
व्यापारियों के लिए कल्याण आयोग और सामाजिक सुरक्षा योजना लागू करने की मांग
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार सुरक्षा मंच के प्रदेशाध्यक्ष नितिन अग्रवाल ने महाराष्ट्र सरकार से की मांग
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे : व्यापारी और उद्योग जगत राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। व्यापारी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों के माध्यम से सरकार के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ ही लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में व्यापारियों की सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार को विशेष नीतियां बनाकर उनका प्रभावी क्रियान्वयन करना चाहिए, यह मांग अखिल भारतीय उद्योग व्यापार सुरक्षा मंच, महाराष्ट्र के प्रदेशाध्यक्ष नितिन अग्रवाल ने पत्रकार परिषदे में की है।
अग्रवाल ने महाराष्ट्र सरकार से राज्य में व्यापारी कल्याण आयोग का गठन करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और महाराष्ट्र देश के प्रमुख व्यापारिक एवं औद्योगिक राज्यों में शामिल है। विभिन्न वर्गों के लिए अलग-अलग आयोग गठित किए गए हैं। इसी तर्ज पर व्यापारियों की समस्याओं, अधिकारों एवं कल्याण से जुड़े विषयों के समाधान के लिए स्वतंत्र व्यापारी कल्याण आयोग बनाया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि नियमित रूप से करों का भुगतान कर राज्य और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले व्यापारियों के लिए सरकार को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। इसमें छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा, दुर्घटना सहायता, पेंशन सहित अन्य आवश्यक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को शामिल किया जा सकता है।
व्यापारियों के लिए ‘व्यापारी सुरक्षा एवं आपदा राहत कोष’ बनाया जाए। आग, बाढ़, भूकंप, दंगे अथवा अन्य प्राकृतिक एवं आकस्मिक आपदाओं में दुकान, गोदाम या व्यावसायिक संपत्ति को नुकसान होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ऐसी मांग भी उन्होंने की।
इसके साथ ही प्रत्येक प्रमुख व्यापारिक बाजार में सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने और इन कैमरों को पुलिस कंट्रोल रूम से जोड़ने की मांग की गई है। चोरी, लूट, आगजनी एवं अन्य आपराधिक घटनाओं की रोकथाम के लिए सीसीटीवी व्यवस्था की नियमित निगरानी और रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
व्यापारियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए ‘सिंगल विंडो शिकायत निवारण प्रणाली’ शुरू करने की मांग करते हुए अग्रवाल ने कहा कि लाइसेंस, स्थानीय निकाय, बिजली, टैक्स, पुलिस, अग्निशमन सहित विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध तरीके से निवारण होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यापार एवं उद्योग से संबंधित नई नीतियां, कर व्यवस्था या नियम बनाते समय व्यापारी संगठनों और उद्योग प्रतिनिधियों से पूर्व विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। साथ ही राज्य सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच नियमित संवाद के लिए राज्यस्तरीय व्यापारी संवाद बैठक आयोजित कर लंबित मांगों और समस्याओं पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की जानी चाहिए।
अग्रवाल ने अधिक कर भुगतान करने वाले व्यापारियों को स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर जिला एवं राज्य स्तर पर सम्मानित करने की मांग भी की।
उन्होंने कहा कि व्यापारी केवल करदाता नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति में महत्वपूर्ण भागीदार हैं। इसलिए व्यापारियों की सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया जाना चाहिए।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार सुरक्षा मंच ने महाराष्ट्र सरकार से उपरोक्त मांगों पर गंभीरता से विचार कर व्यापारी हित में ठोस एवं दीर्घकालीन नीति बनाने तथा सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच मजबूत संवाद व्यवस्था स्थापित करने का आग्रह किया है।


