
विश्व शांति और सतत विकास के कार्य पर जोर दिया जाए:– गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू का आह्वान
दीर्घकालिक विकास और विश्व शांति के लिए गोवा के सामाजिक संस्थानों, संप्रदायों और अंतरधार्मिक संवाद कार्यक्रम का उद्घाटन
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पणजी गोवा
पणजी,: शिक्षा के माध्यम से जिम्मेदार नागरिक तैयार हों, ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आज आवश्यकता है। इसलिए अलग शैक्षिक मॉडल के माध्यम से छात्रों में अच्छे मूल्यों को स्थापित किया जाना चाहिए। वर्तमान समय में हमने भू-भागों को एकजुट करना सीख लिया है, लेकिन लोगों के दिलों को एकजुट नहीं कर पाए हैं। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के सिद्धांत का पालन करने से पूरी दुनिया में शांति स्थापित होगी। इसलिए सभी को विश्व शांति और मानवता के सतत विकास के लिए कार्य करना चाहिए, ऐसा आह्वान गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू ने किया।
वे वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, गोवा और यूनेस्को चेयर के संयुक्त तत्वावधान में गोवा स्थित वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘दीर्घकालिक विकास और विश्व शांति के लिए गोवा के सामाजिक संस्थान, संप्रदाय और अंतरधार्मिक संवाद’ कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
इस अवसर पर गोवा के विधायक नीलकंठ हलर्णकर, गोवा विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. मालापति जनार्दनम, डब्ल्यूपीयू के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड, कार्यक्रम के संयोजक डॉ. संजय उपाध्ये, सह-संयोजक डॉ. मिलिंद पात्रे, डब्ल्यूपीयू के कुलपति प्रो. डॉ. रविराज सीताराम, कुलसचिव डॉ. गणेश पोकले और अधिवक्ता शशिकांत जोशी उपस्थित थे।
इस अवसर पर गोवा वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष व यूनेस्को चेयर प्रमुख प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित थे।
राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू ने कहा, “न्याय, अहिंसा और सभी के प्रति सम्मान ये सभी धर्मों के सिद्धांत हैं और यही मानवता का सूत्र है। सभी को इसी विचार के साथ कार्य करना चाहिए। लोकतंत्र मानवीय गरिमा का आधार है। वर्तमान समय में सर्व-धर्म सहिष्णुता की शिक्षा पद्धति की आज हर जगह आवश्यकता है। पर्यावरण का संरक्षण कर सतत विकास साधना आवश्यक है।”

डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड ने कहा, “गोवा पर्यटन स्थल होने के बावजूद यहां विद्वानों का जमावड़ा है। साथ ही यह सतत विकास के लिए दुनिया का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है। सर्व-धर्म समभाव की शिक्षा को शिक्षा व्यवस्था में कैसे लाया जाए, यह विचार महत्वपूर्ण है। इससे ही समाज में शांति और स्थिरता आएगी। हम शिक्षा के माध्यम से सामाजिक उत्तरदायित्व की विचारधारा के साथ काम करते हैं। शिक्षा ही सामाजिक व्यवस्था को आकार देती है। यहां के विश्वविद्यालय के माध्यम से बहु-विषयक शिक्षा प्रणाली प्रदान करने का उद्देश्य है।”
डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने ऑनलाइन संदेश में कहा कि, “विश्व शांति का संदेश पूरी दुनिया में पहुंचाने के लिए यह विश्वविद्यालय निरंतर कार्यरत है। विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय से दी जाने वाली शिक्षा के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।”

डॉ. रविराज सीताराम ने कहा, “डब्ल्यू.पी.यू. ने शांति के सिद्धांत को धारण कर शिक्षा के माध्यम से मूल्य-आधारित ज्ञान देने का कार्य किया है। उसी सिद्धांत का पालन कर दूसरी पीढ़ी ने शिक्षा की नई अवधारणा सामने रखी है। डॉ. राहुल कराड ने गोवा में विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय का बीज बोया है। इससे पहले उन्होंने एल.टी.सी., एन.एल.सी. और बी.सी.एस. जैसे अद्वितीय कार्यक्रम शुरू किए हैं।”
डॉ. संजय उपाध्ये ने प्रस्तावना के माध्यम से बताया कि ‘दीर्घकालिक विकास और विश्व शांति के लिए गोवा के सामाजिक संस्थान, संप्रदाय और अंतरधार्मिक संवाद’ विषय की आज समाज को क्यों आवश्यकता है।
संचालन डॉ. गौतम बापट ने किया और आभार डॉ. मिलिंद पात्रे ने व्यक्त किया।
विश्व शांति, मूल्य-आधारित वैश्विक शिक्षा और गोवा की समृद्धि के लिए आंदोलन खड़ा किया जाए
इस अवसर पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि दुनिया भर में बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए सभी को एक साथ आकर विश्व शांति के लिए प्रयास करना, समृद्ध और गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा वाले गोवा में सतत विकास को बढ़ावा देना, पर्यावरण संरक्षण के लिए आंदोलन खड़ा करना, सतत जल प्रबंधन के लिए कार्य करना, पर्यावरण संरक्षण के लिए कानूनों को सख्ती से लागू करना, भूमि क्षरण को रोकने के लिए जन जागरूकता, ग्रामीण और शहरी बस्तियों में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानूनों को सख्त करना, गोवा में स्थापत्य और ऐतिहासिक स्थलों की रक्षा करना और विज्ञान-अध्यात्म पर आधारित मूल्य-आधारित वैश्विक शिक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए विश्व मूल्य-आधारित वैश्विक शिक्षा प्रबंधन परिषद की स्थापना की जाए।


