
बोगस दस्तावेजों के आधार पर SRA में धोखाधड़ी का आरोप; येरवडा के नागरिकों का झोपड़पट्टी पुनर्वसन कार्यालय पर भव्य विरोध मार्च
51% सहमति की शर्त हटाकर पहले की तरह 70% की जाए: राहुल डंबाले की प्रमुख मांग
अन्यायपूर्ण तरीके से SRA परियोजना लागू नहीं होने देंगे: वरिष्ठ नेता एड. अयूब शेख की चेतावनी
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे: येरवडा के जाधवनगर में प्रस्तावित झोपड़पट्टी पुनर्वसन (SRA) परियोजना में डेवलपर मे. पश्चिम बिल्डर्स द्वारा कथित धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज पेश किए जाने के विरोध में आज नागरिकों ने झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) कार्यालय पर विशाल विरोध मार्च निकाला।
रिपब्लिकन सोशलिस्ट पार्टी और जाधवनगर SRA विरोधी कृती समिति की ओर से आयोजित इस आंदोलन में 200 से अधिक महिला और पुरुष नागरिक शामिल हुए। इस मार्च से गणेशखिंड रोड स्थित काकडे मॉल परिसर में जोरदार विरोध देखने को मिला।
51% की जगह 70% सहमति की मांग
आंदोलन के दौरान रिपब्लिकन सोशलिस्ट पार्टी के नेता राहुल डंबाले ने SRA नियमों में बदलाव की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लागू 51 प्रतिशत सहमति की शर्त डेवलपर के हित में है और इससे अनियमितताओं की आशंका बढ़ रही है।
उन्होंने मांग की कि 51 प्रतिशत सहमति की शर्त तत्काल रद्द कर पहले की तरह 70 प्रतिशत सहमति अनिवार्य की जाए। साथ ही डेवलपर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने की मांग भी की गई।
अन्यायपूर्ण SRA परियोजना बर्दाश्त नहीं करेंगे: एड. अयूब शेख
वरिष्ठ नेता और पूर्व नगरसेवक एड. अयूब शेख ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि गरीब झोपड़ीधारकों के कथित फर्जी दस्तावेज और सहमति पत्र पेश कर प्राधिकरण को गुमराह करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि येरवडा के नागरिकों पर अन्यायपूर्ण तरीके से SRA परियोजना थोपी नहीं जाने दी जाएगी।
सुहास टिंगरे और रवि टिंगरे ने दिया समर्थन
स्थानीय प्रतिनिधि सुहास टिंगरे और रवि टिंगरे ने भी नागरिकों की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि गरीब झोपड़ीधारकों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने देने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
प्रशासन ने सर्वेक्षण तत्काल रोका
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण की सचिव शीतल निकम ने आंदोलनकारियों से मुलाकात की।
प्रशासन की ओर से जाधवनगर की विवादित SRA योजना का चल रहा सर्वेक्षण तत्काल स्थगित करने की घोषणा की गई।
साथ ही अगले सप्ताह मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और झोपड़ीधारकों के बीच संयुक्त सुनवाई आयोजित करने का आश्वासन दिया गया। सुनवाई के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई।
प्रशासन के इस फैसले के बाद आंदोलनकारियों ने संतोष व्यक्त किया।


