
मानव स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए ईकोसिस्टम है ‘अमृत’
टेक्नोलॉजी आधारित वैश्विक ड्रग डिस्कवरी एंड डेवलपमेंट कंपनी ऑनकोकॉइन ए.जी भारत में मरीजों के लिए लॉन्च करेगी बिटकॉइन जैसा क्रिप्टो टॉकन ‘अमृत’
पुणे, :अपने नाम 43 पेटेंट और 116 से अधिक पेटेंट एप्लीकेशन रखने वाली आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (ए.आई) और ब्लॉकचेन आधारित ड्रग डिस्कवरी एंड डेवलपमेंट क्षेत्र की अग्रणी इंटरनेशल कंपनी इनोप्लेक्सस ए.जी की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुशंगी ऑनकोकॉइन ए.जी मरीजों के स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए ए.आई को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनी दुनिया केसबसेबड़ेमेंसेएक, विकेंद्रीकृत और जी.डी.पी.आर का उपयोग करने वाला रियल वर्ल्ड डाटा (आर.डब्ल्यू.डी.)एक्सचेंज अमृत लॉन्च करने जा रही है।अमृत शब्द ऐसे रस के लिए उपयोग होता है जो अमरत्वप्रदान करता है।
कैंसर (कर्करोग) दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है जिसके विभिन्न रूपों के विकार हर वर्ष लाखों लोगों की जान ले लेते हैं। मेडिकल क्षेत्र से जुड़ा वैश्विक समुदाय कैंसर के मरीजों के इलाज के लिए बेहतर दवाएं और उपचार खोजने के लिए लगातार शोध कर रहा है और उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ तकनीकों की मदद से डाटा का विश्लेषण कर रहा है। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि फार्मा इंडस्ट्री मरीज केंद्रित तंत्रपरपर्याप्त जोर नहीं दे रही है। लाइफ साइंसेज के क्षेत्र में शोध करने वाली कंपनियों के लिए यह डाटा अनमोल संपत्ति बन गया है, लेकिन डाटा साझा करने से मरीजों को कोई फायदा नहीं मिलताहै।
इस मामले में ‘अमृत’ ईकोसिस्टम अहम भूमिका निभाएगा और हेल्थकेयर सॉल्यूशन में 130करोड़ भारतीयों की बराबर भूमिका सुनिश्चित करेगा। इस प्लेटफॉर्म से फिलहाल वैश्विक स्तर पर 3.5 लाख उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं। अमृतपेटेंट युक्त ए.आई और ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का उपयोग करता है और विकेंद्रित ईकोसिस्टम के जरिए दवाओं की खोज और विकास को रफ्तार देने के लिए विभिन्न हितधारकों जैसे मेडिकल शोधार्थियों, चिकित्सकों, फार्मा कंपनियों, अस्पतालों, सी.आर.ओ आदि की मदद करता है। इसके कैंसर एप के अलावा कंपनी इस साल के आखिर तक न्यूरोलॉजी एप भी लॉन्च करने की योजना बना रही है जो अल्ज़ाइमर, पार्किन्सन सहित विभिन्न बीमारियों को कवर करेगी।
इस बारे में जानकारीदेते हुए इनोप्लेक्सस ए.जी के सी.ई.ओ और ऑनकोकॉइन एजी बोर्ड के चेयरमैन/फाउंडर डॉ. गुंजन भारद्वाज ने कहा, ‘अमृत ईकोसिस्टम मोबाइल एपक्यूरियापर वैश्विक स्तर पर रजिस्टर्ड 3.5 लाख यूजर्स का डाटा उपलब्ध करवाकर कैंसर रिसर्च की प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाता है। इस एप के जरिए क्लीनिकल ट्रायल करने की इच्छुक कपंनियां मरीजों को इसमें शामिल करने के लिए उनसे सीधे संपर्क कर सकती हैं और उनको रियल वर्ल्ड डाटा शेयर करने के लिए यूटिलिटी टोकन ‘अमृत’ देकर प्रोत्साहन दे सकती हैं।इसके बाद यूजर्स इस अमृत टोकन का उपयोग सैकंड ओपीनियन और कैंसर संबंधी अन्य इन एप सेवाओं के लिए कर सकते हैं। यह एक अभूतपूर्व ईकोसिस्टम है जिसका फिलहाल पूरी दुनिया में कहीं कोई मुकाबला नहीं है।’
डॉ. भारद्वाज ने आगे कहा, ‘हम हमेशा से इस बात में विश्वास करते आए हैं कि आधुनिक तकनीक का फायदा लोगों, विशेष तौर पर कैंसर मरीजों को मिलना चाहिए। इस मामले में अमृत की ईकोसिस्टम अप्रोच मरीजों को कई प्रकार से मदद करती है। पहले स्तर पर यह ईकोसिस्टम मरीजों को उनकी बीमारी के प्रकार और स्टेज के बारे में निशुल्क सूचना प्रदान करता है। यह उनको अपनी बीमारी के प्रकार और स्टेज के मुताबिक उचित मेडिकल एक्सपर्ट की पहचान करने में मदद करता है और उनको बीमारी की चिकित्सा के अन्य विकल्पों की पहचान में भी मदद करता है। इसके अलावा यह एप उनको उनके आसपास उनके लिए सबसे उपयुक्त क्लीनिकल ट्रायल की पहचान कर उसमें शामिल होने में सक्षम बनाता है।’



