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चुनावी प्रक्रिया में सुधार हेतु चुनाव आयोग से की गई मांग: चुनाव विशेषज्ञ डॉ. तुषार निकाळजे की पहल

चुनावी प्रक्रिया में सुधार हेतु चुनाव आयोग से की गई मांग: चुनाव विशेषज्ञ डॉ. तुषार निकाळजे की पहल

 

विशाल समाचार, पुणे 

भारतीय निर्वाचन प्रणाली के शोधकर्ता डॉ. तुषार निकाळजे ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (नई दिल्ली) को पत्र लिखकर चुनावी प्रशासन में सुधार संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। यह पत्राचार वे जनवरी 2022 से लगातार कर रहे हैं। हाल ही में चुनाव आयोग ने केरल, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों की नगरपालिकाओं और रिक्त प्रभागों में उपचुनाव आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। यह चुनावी प्रक्रिया आगामी चार महीनों में पूरी की जानी है।

 

प्राकृतिक आपदा और महामारी की स्थिति में चुनावी प्रक्रिया पर चिंता..

डॉ. निकाळजे ने अपने पत्र में यह दर्शाया है कि वर्तमान में देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियाँ पैदा हो गई हैं। साथ ही, कोविड-19 के मामलों में फिर से वृद्धि देखी जा रही है। इस परिस्थिति में मतदाता और चुनाव कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे मतदान प्रतिशत भी गिर सकता है। ऐसे में, चुनावी प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की पूरी आशंका है।

 

प्रस्तावित सुधार और सुझाव

 

 

1. हाउसिंग सोसायटी में मतदान केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव

डॉ. निकाळजे ने 2022 में ही प्रस्ताव दिया था कि सहकारी गृह निर्माण संस्थानों (हाउसिंग सोसायटी) में मतदान केंद्र स्थापित किए जाएं। 2024 में महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में इसका प्रयोग हुआ भी था और यह प्रयोग सफल रहा। इससे मतदान में तक वृद्धि देखी गई। दिव्यांग, वृद्ध और बीमार मतदाताओं के लिए यह व्यवस्था अत्यंत सुविधाजनक सिद्ध हुई।

डॉ निकालजे ने यह मतदान 14 से 16 % बढ़ने की आशा व्यक्त की है।

2. चुनावी कागजातों का रंग आधारित वर्गीकरण (Color Coding)

वर्तमान प्रक्रिया में मतदान के बाद चुनाव अधिकारी अलग-अलग रंग के लिफाफों (जैसे नीला, पीला, गुलाबी आदि) में दिनभर की रिपोर्ट और दस्तावेज भरते हैं। यह प्रक्रिया 80 से 90 मिनट तक चलती है। डॉ. निकाळजे ने सुझाव दिया कि दस्तावेजों का सुव्यवस्थित रंग वर्गीकरण किया जाए, जिससे यह प्रक्रिया 40-45 मिनट में पूरी हो सके और चुनाव सामग्री रात 11-12 बजे की बजाय पहले जमा की जा सके। यह प्रस्ताव 2022 से आयोग के पास लंबित है। संविधानिक और असंवैधानिक लिफाफा कहा जाता है।

3. चुनाव कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि की मांग

भारत में हर चुनाव में करीब 10 लाख से अधिक मतदान केंद्रों पर लगभग 53 लाख अधिकारी व कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर तैनात होते हैं। इससे चुनाव आयोग को प्रति चुनाव लगभग ₹800 करोड़ की बचत होती है। वर्ष 2009 के बाद से इन कर्मचारियों के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। डॉ. निकाळजे ने मांग की है कि बचत राशि में से ₹600 करोड़ के भीतर इन कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की जाए।

4. शिक्षा में चुनावी जागरूकता को स्थान

डॉ. निकाळजे ने सुझाव दिया है कि दसवीं कक्षा के नागरिकशास्त्र और इतिहास विषय में मतदान प्रक्रिया पर एक अलग पाठ जोड़ा जाए। साथ ही, यूजीसी द्वारा 2017 में प्रस्तावित “लोकतंत्र, सुशासन और चुनाव” विषय का पाठ्यक्रम जो पहले सभी पाठ्यक्रमों में अनिवार्य किया गया था, उसे पुनः लागू किया जाए। इससे देश के हर नागरिक को चुनावी प्रक्रिया की जानकारी होगी और यह ज्ञान घर-घर तक पहुंचेगा।

अन्य सुझाव और महत्त्वपूर्ण बिंदु

डॉ. निकाळजे द्वारा भेजे गए अन्य सुझावों में चुनाव प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में अनेक उपाय शामिल हैं। उनका कहना है कि भारत न केवल एशियाई चुनाव फेडरेशन का अध्यक्ष है, बल्कि 92 देशों ने भारत के साथ चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर समझौते भी किए हैं। ऐसे में, भारत को चुनाव सुधार के क्षेत्र में नेतृत्व करना चाहिए।

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