
इटावा में ‘बंद दरवाज़ों‘ में हुई पत्रकार बैठक, नेशनल मीडिया से भेदभाव पर विशाल समाचार का विरोध तेज़ — सूचना विभाग को अब लिखित शिकायत
इटावा | विशेष संवाददाता
इटावा जिले में शुक्रवार को जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में जिला स्तरीय स्थायी पत्रकार समिति की बैठक बिना किसी सार्वजनिक सूचना के आयोजित की गई। इस बैठक को लेकर अब नेशनल मीडिया संस्थानों में तीव्र रोष है, क्योंकि न तो किसी पोर्टल, चैनल या अख़बार को औपचारिक आमंत्रण मिला और न ही सूचना विभाग की ओर से कोई प्रेस विज्ञप्ति पहले साझा की गई।
पहले फोन पर की थी शिकायत, अब दी जाएगी लिखित शिकायत
विशाल समाचार नेटवर्क ने इस विषय को पहले ही सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, लखनऊ के संज्ञान में फोनिक रूप से लाया था। लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होते देख अब लिखित शिकायत तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजी जा रही है, ताकि यह मामला सिर्फ इटावा तक सीमित न रहकर लखनऊ व दिल्ली तक गूंजे।
पत्रकारों को किया गया अलग — किस आधार पर हुआ चयन?
बैठक में प्रशासन द्वारा चंद पत्रकारों को बुलाकर फोटो खिंचवाई गई, कुछ सुझाव सुने गए और फिर एकतरफा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी गई। लेकिन न तो यह बताया गया कि किन पत्रकारों को क्यों बुलाया गया, न ही यह स्पष्ट हुआ कि नेशनल मीडिया को बार-बार उपेक्षित क्यों किया जाता है।
सिर्फ दिखावा नहीं, जवाबदेही चाहिए
इटावा में यह कोई पहली घटना नहीं है — कई बार 30 मिनट पहले “सूचना भेजकर औपचारिकता निभा दी जाती है”, और कभी पूरी तरह चुपचाप बैठक निपटा दी जाती है। यह रवैया अब पत्रकारिता के गरिमामय स्वरूप और लोकतंत्र की आत्मा के विरुद्ध खड़ा हो चुका है।
विशाल समाचार नेटवर्क की अगली कार्यवाही:
RTI दाखिल की जा रही है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि—
बैठक की तिथि व सूचना किसे कब दी गई?
कितने पत्रकार बुलाए गए, किस मानक पर?
सूचना विभाग की भूमिका क्या रही?
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, राज्य सूचना आयोग और मुख्यमंत्री कार्यालय को भी इस भेदभाव की रिपोर्ट भेजी जाएगी।
अब वक्त आ गया है — सौतेले व्यवहार पर लगाम लगे
इटावा प्रशासन द्वारा अपनाया गया यह सिलसिला — जिसमें चुनिंदा पत्रकारों को मंच दिया जाता है और बाकी को बहिष्कृत किया जाता है — अब बर्दाश्त के बाहर है। पत्रकार केवल खबर के वाहक नहीं होते, वे समाज की चेतना होते हैं। इस चेतना को दबाने की हर कोशिश के खिलाफ विशाल समाचार अपने नेटवर्क के हर राज्य से आवाज़ उठाएगा।
विशाल समाचार स्पष्ट करता है-अब संवाद की भाषा “चयन” नहीं, “सम्मान” होनी चाहिए।पत्रकारों को दबाया नहीं जा सकता – और इटावा इसका उदाहरण बनने जा रहा है।



