
सीवान में कालाजार नियंत्रण कार्यक्रम की समीक्षा – डब्ल्यूएचओ प्रतिनिधि और राज्य स्तरीय पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से की समीक्षा बैठक
सीवान: आज जिला एन.वी.बीडीसीपी नियंत्रण कार्यालय, सीवान के प्रांगण में जिलाधिकारी श्रीमती रिची पांडेय, सिविल सर्जन डॉ. अजीतेन्द्र कुमार, जिला एन.वी.बीडीसीपी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. विवेक कुमार यादव, डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि श्री जीतेन लेपिडोस, तथा राज्य स्तरीय पदाधिकारी एवं जिला प्रभारी श्री प्रताप कुमार द्वारा संयुक्त रूप से जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के विशेष प्रकार के रोग कालाजार नियंत्रण की समीक्षा की गई।
एन.वी.बीडीसीपी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. विवेक कुमार यादव ने बताया कि कालाजार उन्मूलन हेतु विशेष अभियान चलाया जा रहा है। वर्ष 2018 में कालाजार से प्रभावित गांवों की संख्या 119 थी, जो घटकर वर्ष 2024 में मात्र 7 रह गई है — जो जिले की एक उत्कृष्ट उपलब्धि है। कालाजार रोकथाम हेतु फील्ड स्तर पर सक्रियता बढ़ाई गई है, हालांकि अभी लगभग 40-50% गांवों में रोकथाम संरचना में कमी है। वर्ष 2020 में 65 मरीज, 2021 में 39, 2023 में 26, और 2024 में 17 मरीज मिले। वर्ष 2025 में जनवरी से अब तक 3 रोगी मिले हैं, जिनमें से एक का निदान हो चुका है तथा शेष दो के लिए टीम कार्यरत है।
जिले के अनुमंडलीय अस्पताल, रेफरल अस्पताल, प्रमुख CHC, ट्राय CHC व CHC में कालाजार/PKDL हेतु विशेष चयनित जांच व इलाज की व्यवस्था है। PKDL का निदान केन्द्रीय स्तर पर निष्पादित किया जाता है। ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की उपलब्धता व पहुँच सुनिश्चित की गई है। निदान उपरांत भारत सरकार द्वारा ₹6600 तथा राज्य सरकार द्वारा ₹500 प्रतिदिन के दर से श्रम क्षतिपूर्ति, और इलाज के बाद ₹4000 की राशि मरीज को दी जाती है।
सिविल सर्जन डॉ. अजीतेन्द्र कुमार ने बताया कि भारत सरकार व बिहार सरकार द्वारा कालाजार रोग उन्मूलन हेतु, जिला एन.वी.बीडीसीपी नियंत्रण पदाधिकारी व उनकी टीम द्वारा किए गए कार्यों के मूल्यांकन हेतु यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह रोग मादा बालू मक्खी से फैलता है। 5% केस इंसेंटिव प्रति मरीज ₹600 की दर से स्वास्थ्यकर्मियों को दिया जाता है। मरीज को 12 दिन की दवा मुफ्त दी जाती है।
हाल ही में 90,433 घरों में खोज अभियान चलाया गया, जिसमें 50,479 घरों का आच्छादन आशा कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया।
डब्ल्यूएचओ प्रतिनिधि श्री जीतेन लेपिडोस ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सीवान जिला कालाजार नियंत्रण में राज्य के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि जिन जिलों में अब मरीज नहीं हैं, वहाँ भी निगरानी आवश्यक है, क्योंकि कालाजार का जीव मिट्टी में जीवित रह सकता है। उन्होंने 90 दिन के फॉलोअप को अनिवार्य बताया। मरीज की पहचान और इलाज की जानकारी घर-घर जाकर स्वास्थ्यकर्मी देते हैं। सामुदायिक सहभागिता को अत्यंत आवश्यक बताया गया।
जनजागरूकता हेतु जिले में माइकिंग, दीवार लेखन, रंगोली, नुक्कड़ नाटक, पम्पलेट वितरण, हैंडबिल, भ्रमण आदि प्रचार गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं।
जिलाधिकारी श्रीमती रिची पांडेय, सिविल सर्जन डॉ. अजीतेन्द्र कुमार, तथा डॉ. विवेक कुमार यादव द्वारा कार्यक्रम की गहन समीक्षा की गई तथा टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
उपस्थित पदाधिकारीगण:
श्रीमती रिची पांडेय, जिलाधिकारी,डॉ. अजीतेन्द्र कुमार, सिविल सर्जन,डॉ. विवेक कुमार यादव, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी,श्री जीतेन लेपिडोस, प्रतिनिधि, डब्ल्यूएचओ,श्री प्रताप कुमार, राज्य समन्वयक डॉ. प्रिय कुमार,श्री पवन कुमार, एएफएचएमएन,श्री रणजीत कुमार, एनवीबीडीसीपी,श्री राकेश कुमार, बीएचएम एनवीसी,श्री विजयविजय प्रकाश, बीएचएम एनवीसी,श्री नवीन कुमार, बीएचएम एनवीसी,श्री रूप रंजन सिंह, बीएचएम,डॉ. राजीव रंजन कुमार, चिकित्सा प्रभारी,श्री रोहित कुमार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण प्रभारी,एएनएम, एमपी डब्ल्यू, व अन्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पदाधिकारीगण



