
इटावा वन विभाग में बड़ा घोटाला उजागर – कबूलनामा होने के बावजूद DFO साक्ष्य मांग रहे!
इटावा (विशाल समाचार )
सामाजिक वानिकी प्रभाग, इटावा में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका खुलासा अब खुद विभाग के भीतर से होने लगा है। जसवंतनगर क्षेत्र के बसरेहर रेंज से जुड़े एक गंभीर मामले में विभाग के ही फॉरेस्ट गार्ड ने 7 लाख रुपये के गबन की स्वीकारोक्ति कर दी है।
यह कबूलनामा नर्सरी व टी-गार्ड कार्यों में हुई भारी अनियमितताओं से जुड़ा है। अनुमान है कि यह घोटाला 30 लाख रुपये या उससे कहीं अधिक का हो सकता है।
कर्मचारी ने मानी गड़बड़ी, मगर तत्कालीन DFO कहें – “साक्ष्य दो”
जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत संख्या 12000250136728 दिनांक 26.06.2025 के तहत की गई जांच में खुद वन विभाग के जवाब में यह स्वीकार किया गया है कि:
> “संबंधित कर्मचारी द्वारा शिकायत में वर्णित अनियमितताओं के संबंध में लिखित रूप से स्वीकारोक्ति दी गई है।”
(स्रोत – पत्रांक 91/33-1 दिनांक 31.07.2025)
बावजूद इसके, तत्कालीन डीएफओ यह कहकर बचने की कोशिश कर रहे हैं कि यह कबूलनामा पर्याप्त साक्ष्य नहीं है।
तो फिर सवाल उठता है — जब विभाग का कर्मचारी खुद गबन मान रहा है, तो और कौन सा साक्ष्य चाहिए तत्कालीन डीएफओ को?
जांच शुरू होने से पहले ही DFO ने ‘मेडिकल’ के बहाने तबादला करवा लिया!
जैसे ही जांच प्रक्रिया प्रारंभ होने वाली थी, पूर्व डीएफओ अतुलकांत शुक्ला ने मेडिकल आधार का हवाला देकर तबादला करवा लिया।
क्या यह सिर्फ संयोग है या पूर्व नियोजित रणनीति?
सबसे बड़ा खुलासा – सरकारी गाड़ी में पकड़ी गई संदिग्ध रकम!
घोटाले का सबसे गंभीर पहलू सामने आया टोला नाका कठफोरी से, जहां चेकिंग के दौरान तीन बड़े अधिकारी — क्षेत्राधिकारी, डिप्टी रेंजर और वन संरक्षक — एक ही कार में संदिग्ध नकदी के साथ रंगे हाथ पकड़े गए।
ध्यान देने वाली बात यह है कि वह कार भी उन्हीं में से एक अधिकारी के नाम थी!
अब उठ रहे बड़े सवाल… और सरकार से जवाब भी जरूरी!
जब कर्मचारी खुद गबन कबूल कर रहा है, तो अफसर किस आधार पर “साक्ष्य” नकार रहे हैं?
क्या विभाग में स्वीकारोक्ति भी कोई मायने नहीं रखती?
आखिर इतनी गंभीर शिकायतों पर अब तक वन मंत्री क्यों चुप हैं?
क्या मुख्यमंत्री को नहीं बताया गया कि उनके ही शासन में अधिकारी कबूलनामे के बावजूद बच निकल रहे हैं?
विशाल समाचार की मांग:वन मंत्री तत्काल इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करें – कबूलनामे के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
मुख्यमंत्री खुद संज्ञान लेकर उच्च स्तरीय जांच दल गठित करें।
तीनों पकड़े गए अधिकारियों के निलंबन और पूर्व डीएफओ की भूमिका की जांच कर जनता को जवाब दें।
विशाल समाचार इस पूरे मामले की परत-दर-परत पड़ताल कर रहा है।
हर अंक में होगा नया खुलासा — अब कोई नहीं बचेगा!
सवाल पूछेंगे… जवाब माँगेंगे… और सच्चाई उजागर करेंगे।



