
“के.वी. गणेशखिंड में स्वतंत्रता दिवस का भव्य उत्सव, देशभक्ति और एकता का अद्भुत संगम”
“के.वी. गणेशखिंड में ध्वजारोहण, परेड और सांस्कृतिक रंगों के संग मना 79वां स्वतंत्रता दिवस”
पुणे डीएस तोमर: पी.एम. श्री केन्द्रीय विद्यालय, गणेशखिंड, पुणे – 07 में भारत का 79वां स्वतंत्रता दिवस दिनांक 15 अगस्त को बड़े उत्साह और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। विद्यालय परिसर को पताकाओं और गुब्बारों से सुंदर सजाया गया था, जिससे पूरे वातावरण में गर्व और आनंद की अनुभूति हो रही थी।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 8:00 बजे हुआ। विद्यार्थी, शिक्षक एवं गणमान्य अतिथि विद्यालय प्रांगण में एकत्रित हुए। मुख्य अतिथि श्री ए. राजू (अध्यक्ष VMC, प्रसिद्ध वैज्ञानिक, ARDE, पाषाण, पुणे), श्री रमेश कुमार (उपाध्यक्ष VMC, उत्कृष्ट वैज्ञानिक, ARDE, पाषाण, पुणे) तथा श्री अविजित पांडा (प्राचार्य, के.वी. गणेशखिंड) के करकमलों से राष्ट्रीय ध्वजारोहण किया गया। इसके पश्चात ‘जन गण मन’ एवं ध्वज गीत का सामूहिक गायन हुआ।
प्राचार्य महोदय ने देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले शूरवीरों को नमन करते हुए एक भावपूर्ण भाषण दिया। तत्पश्चात मुख्य अतिथियों ने प्रेरणादायी संबोधन में स्वतंत्रता, एकता और जिम्मेदारी जैसे राष्ट्रनिर्माण के मूल्यों पर विशेष बल दिया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण एनसीसी परेड रही। विद्यार्थियों ने जो अनुशासन, समन्वय और सटीकता प्रदर्शित की, वह उनके कठोर परिश्रम और प्रशिक्षण का परिचायक था। परेड की सभी ड्रिल और औपचारिक प्रस्तुतियाँ अत्यंत सुंदर एवं त्रुटिहीन रहीं।
इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत, शास्त्रीय एवं लोकनृत्य, वाद्य संगीत और प्रेरक भाषणों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ‘विविधता में एकता’ का अद्भुत प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के उपरांत सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। ARDE की ओर से निम्न का सम्मान किया गया:
3 उत्कृष्ट शिक्षक
कक्षा 10वीं एवं 12वीं के प्रत्येक में 3-3 प्रतिभावान विद्यार्थी
कक्षा 5वीं के 3 मेधावी विद्यार्थी
स्काउट्स एवं गाइड्स में ‘राज्य पुरस्कार’ प्राप्त 2 विद्यार्थी सभी को सम्मानचिन्ह, प्रशस्ति-पत्र एवं नकद पुरस्कार प्रदान किए गए।
अंत में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को मिठाई वितरण कर समारोह का समापन हुआ। यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और सभी ने स्वतंत्रता, एकता एवं सांस्कृतिक सौहार्द का महत्व पुनः अनुभव किया।



