शैक्षणिक संस्थाओं की रैंकिंग पर गंभीर सवाल, अनुदान और भ्रष्टाचार को लेकर बढ़ी मांग
पुणे | विशाल समाचार
दिनांक 3 जुलाई 2025 को प्रकाशित लेख में शैक्षणिक संस्था व विश्वविद्यालयों के कार्यालयों में बेकायदेशीर पैसों का उपयोग, अपात्र अधिकारियों को दी गई पदोन्नतियाँ, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा आयोग द्वारा शैक्षणिक संस्थाओं और विश्वविद्यालयों को दिए गए 100 से 400 करोड़ रुपये तक के अनुदान का मैदाने, इमारतें, फूड मॉल, रिसर्च पार्क इमारतें आदि पर किया गया खर्च, सुधार समितियों पर किया गया खर्च, छात्रों व शोधकर्ताओं की फीस वृद्धि, पुलिस प्रशासन के पास संबंधित शैक्षणिक संस्थाओं व विश्वविद्यालयों के विरुद्ध की गई शिकायतें, विश्वविद्यालयों की वेबसाइट पर रिसर्च एंड पब्लिकेशन में दर्ज जानकारी में पाई गई तफावत, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा कुछ विश्वविद्यालयों की रैंकिंग को लेकर पिछले तीन वर्षों से चल रही जांच, प्रसार माध्यमों में प्रकाशित समाचार और NAAC मूल्यांकन न होने के बावजूद कुछ शैक्षणिक संस्थाओं व विश्वविद्यालयों का रैंकिंग में समावेश जैसे मुद्दों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
इन सभी कारणों से कुछ राज्यों के स्टेट विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थाओं की पीछेहाट हुई है, जिससे युवा और अभिभावक नाराज हैं। फीस वृद्धि का असर इतना हुआ है कि कुछ पाठ्यक्रमों में छात्रों ने प्रवेश ही नहीं लिया। इससे स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की आगामी चुनावी राजनीति पर प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
यदि विपक्ष इस मुद्दे को उठाए या इन सभी मामलों पर पीछेहाट झेल रहे शैक्षणिक संस्थाओं व विश्वविद्यालयों के कामकाज की जांच के लिए समिति गठित की जाए, तो भविष्य में सुधार की संभावनाएँ प्रबल मानी जा रही हैं। पूर्व में भी कुछ विश्वविद्यालयों के कामकाज की जांच समिति नियुक्त होने के बाद उच्च पदस्थ पदाधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं।



