सीतामढ़ी सदर अस्पताल की लापरवाही ने छीनी एक और जान
संपादकीय|टीम विशाल समाचार
सीतामढ़ी सदर अस्पताल से एक बार फिर शर्मनाक खबर आई है। डुमरा थाना क्षेत्र के बनचौड़ी गांव की काजल खातून की प्रसव के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने गलत इंजेक्शन दिया और समय रहते इलाज नहीं किया, जिसके कारण यह त्रासदी हुई।
घटना के बाद अस्पताल में हंगामा हुआ, शव को रखकर विरोध किया गया और माहौल अफरातफरी में बदल गया। पुलिस को दखल देना पड़ा और सिविल सर्जन ने जांच का आश्वासन दिया।
सवाल यही है—आख़िर हर बार जांच के नाम पर जिम्मेदारी क्यों टाल दी जाती है? क्या सरकारी अस्पतालों में गरीबों की जिंदगी इतनी सस्ती हो गई है कि इलाज की जगह लापरवाही ही उनकी नियति बन गई है?
सीतामढ़ी समेत बिहार के अधिकांश सरकारी अस्पतालों का हाल यही है—
मरीजों को समय पर दवा और उपचार नहीं मिलता।
स्टाफ की मनमानी और उदासीनता आम है।
जांच समितियाँ सिर्फ कागज़ों पर बनती हैं, दोषियों पर कार्रवाई कम ही होती है।
नतीजा:हर हादसे के बाद गरीब परिवार उजड़ जाते हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था फिर से सवालों के घेरे में खड़ी हो जाती है।
अब वक्त आ गया है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग कठोर कदम उठाएँ, ताकि अस्पताल सचमुच इलाज का केंद्र बने, मौत का गढ़ नहीं।



