
कृत्रिम रेत उत्पादन के लिए अधिक से अधिक उद्यमियों को आगे आना चाहिए – जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी
रिंग रोड और पुरंदर हवाई अड्डे सहित विकास कार्यों को मिलेगी गति
पुणे (सोहन सिंह तोमर ):
प्राकृतिक रेत के विकल्प के रूप में राज्य सरकार ने कृत्रिम रेत (एम-सैंड) उत्पादन की नीति लागू की है। जिले में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों में बढ़ती मांग और आपूर्ति की कमी को देखते हुए अधिकाधिक उद्यमियों को इस क्षेत्र में पंजीकरण करना चाहिए, ऐसा आवाहन जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने किया।
जिलाधिकारी कार्यालय के बहुउद्देशीय सभागार में कृत्रिम रेत नीति एवं उसके क्रियान्वयन पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन जिलाधिकारी श्री डुडी ने किया। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी सुहास मापारी, निवासी उपजिलाधिकारी ज्योति कदम, जिला खनन अधिकारी आनंद पाटील सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, शार्या इन्फोटेक के पदाधिकारी, पर्यावरण सलाहकार, प्राइवेट टेक के प्रतिनिधि, खदान पट्टाधारक तथा क्रशर संचालक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
श्री डुडी ने कहा कि राजस्व एवं वन विभाग के 23 मई 2025 के शासन निर्णयानुसार राज्य में विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए कृत्रिम रेत के उपयोग की नीति तय की गई है। जिले में सबसे पहले पहल करने वाली और पंजीकरण कराने वाली 50 संस्थाओं को एम-सैंड यूनिट स्थापित करने हेतु उद्योग तथा राजस्व विभाग की ओर से विविध रियायतें प्रदान की जाएंगी। साथ ही, राजस्व एवं वन विभाग के 17 जुलाई 2025 के शासन परिपत्रानुसार कृत्रिम रेत नीति के कार्यान्वयन की कार्यप्रणाली भी निश्चित की गई है।
उन्होंने आगे कहा कि प्राकृतिक रेत के विकल्प के रूप में लागू इस नीति से पुणे रिंग रोड, पुरंदर हवाई अड्डा सहित विभिन्न विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी। मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन साधने में भी यह नीति सहायक होगी। एम-सैंड परियोजना हेतु स्वामित्वधन पर 400 रुपये प्रति ब्रास की रियायत शासन द्वारा दी गई है।
इस कार्यशाला में संबंधित विभागों की ओर से की जाने वाली कार्यवाही की जानकारी दी गई। खदान पट्टाधारकों और क्रशर संचालकों की शंकाओं एवं समस्याओं का निराकरण किया गया। लगभग 200 इच्छुक उद्यमियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। जिले के उपविभागीय अधिकारी और तहसीलदार भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसमें जुड़े।


