
विशेष खुलासा : इटावा वन विभाग के काले कारनामों का पर्दाफाश
इटावा। विशाल समाचार
सामाजिक वानिकी प्रभागीय कार्यालय, इटावा में व्याप्त भ्रष्टाचार और मनमानी के काले कारनामे अब उजागर होने लगे हैं। बसरेहर रेंज, ब्लॉक जसवंतनगर में लंबे समय से चल रही वसूली और विभागीय हेराफेरी की परतें अब खुलने लगी हैं।
जांच शुरू होते ही ‘मेडिकल तबादला’
सूत्रों के अनुसार, जैसे ही विभागीय जांच की आहट हुई, उसी समय पूर्व डीएफओ अतुलकांत शुक्ला ने मेडिकल आधार पर अपना तबादला करवा लिया। यह तबादला ठीक उस वक्त हुआ, जब जांच की शुरुआत होने ही वाली थी। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह महज़ संयोग था या फिर पहले से तय की गई रणनीति?
फॉरेस्ट गार्ड का कबूलनामा
सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह है कि फॉरेस्ट गार्ड ने खुद स्वीकार किया कि नर्सरी कार्य में 7 लाख रुपये की हेराफेरी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, यह रकम बढ़कर 30 लाख रुपये तक पहुँच सकती है।
जब विभाग का ही कर्मचारी घोटाले की बात स्वीकार कर रहा है, तो सवाल यह है कि डीएफओ इटावा किस साक्ष्य की तलाश में हैं?
भ्रष्टाचार बचाने की चालबाज़ी
सूत्रों के दावों के अनुसार, डीएफओ, क्षेत्राधिकारी (डिप्टी रेंजर) और वन रक्षक—तीनों ही अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोपों से बचने के लिए षड्यंत्र रच रहे हैं।
ईमानदार व भ्रष्टाचार विरोधी वन दरोगाओं के खिलाफ झूठी शिकायतें कराकर उनका तबादला किया जा रहा है।
अपने परिचित और चहेते लोगों को कार्यालय में आरामदायक ड्यूटी दी जा रही है।
हाल ही में एक “महात्मा पुरुष” के नाम से फर्जी शिकायत दर्ज कराई गई, जिसकी आड़ में एक तेज़-तर्रार दरोगा का तबादला करा दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि जिस महात्मा पुरुष का नाम शिकायत में इस्तेमाल किया गया, उन्हें इसकी कोई जानकारी ही नहीं थी।
विशाल समाचार के हाथ में साक्ष्य
अब “विशाल समाचार” चैनल को इस पूरे प्रकरण से जुड़े पक्के सबूत हाथ लगे हैं।
ये साक्ष्य पुणे (महाराष्ट्र) की केंद्रीय टीम के माध्यम से लखनऊ भेजे जा रहे हैं।
बहुत जल्द ये दस्तावेज़ माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वन मंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
“विशाल समाचार” की केंद्रीय टीम खुद वहाँ मौजूद रहकर जवाब-सवाल करेगी।
जनता पर असर
इस घोटाले का असर केवल कागज़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों, किसानों और पर्यावरण संरक्षण योजनाओं पर भी पड़ रहा है।
नर्सरी घोटाले से पौधारोपण योजनाएँ प्रभावित हो रही हैं।
पर्यावरण सुरक्षा और हरित क्षेत्र बढ़ाने की परियोजनाएँ अधर में लटकी हुई हैं।
ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि विभाग भ्रष्टाचार और वसूली में व्यस्त है, जबकि ज़मीनी काम ठप पड़ा है।
जनता के सवाल
• जब गार्ड ने ही घोटाले की बात मान ली तो कार्रवाई क्यों नहीं?
• ईमानदार अधिकारियों का तबादला और भ्रष्टों को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है?
• विभागीय हेराफेरी की जिम्मेदारी कौन लेगा?
• आखिर कब तक इटावा वन विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा बना रहेगा?
विशाल समाचार ने यह मिशन अपने हाथ में लिया है।अब न कोई पर्दा बचेगा, न कोई बहाना!
हर अंक और हर रिपोर्ट में होगा खुलासा —
इटावा वन विभाग के काले कारनामों का पूरा-पूरा पर्दाफाश… और बहुत कुछ!

