
अवयवदान प्रक्रियाओं के प्रचार–प्रसार की आवश्यकता – आरती गोखले
पुणे: अवयवदान में दाताओं की संख्या कम और दान इच्छुकों की संख्या अधिक है। इस कारण अवयवदान का व्यापक प्रचार–प्रसार आवश्यक है। यह बात अवयव प्रत्यारोपण समन्वयक आरती गोखले ने हिंदू महिला सभा द्वारा आयोजित दुर्गा पुरस्कार वितरण समारोह में कही।
ज्येष्ठ शल्य चिकित्सक डॉ. माया तुळपुळे ने आरती गोखले को इस वर्ष का दुर्गा पुरस्कार प्रदान किया। पुरस्कार में 10,000 रुपये नकद, मानचिन्ह और मानपत्र शामिल थे। कार्यक्रम में हिंदू महिला सभा की अध्यक्ष सुप्रिया दामले और ‘सखी रथ’ की दीपाली कडू भी उपस्थित थीं।
आरती गोखले ने कहा, “मेंदूमृत रोगियों के अवयव दान किए जा सकते हैं। इसके लिए परिवार और नातेदारों का समुपदेशन आवश्यक है। मैंने पिछले 20 वर्षों से अवयवदान और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में प्रशिक्षण और जनजागरूकता अभियान चलाए हैं। शरीर के लगभग 46 अवयव दान योग्य हैं, लेकिन इच्छा और पारिवारिक अनुमति के बिना दान संभव नहीं है। अवयवदान की प्रक्रिया पारदर्शी है और इसे अधिक से अधिक फैलाना आवश्यक है।”
डॉ. माया तुळपुळे ने अवयवदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जिवंत और मेंदूमृत दोनों अवस्थाओं में किया जा सकता है। श्रीलंका में नेत्रदान अनिवार्य है और अन्य देशों में दान निर्यात किया जाता है। उन्होंने सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
दीपाली कडू ने ‘सखी रथ’ के माध्यम से महिलाओं को दो–तीन और चारपहिया वाहन चलाना सिखाने की पहल का परिचय दिया। सुप्रिया दामले ने भी अवयवदान की जागरूकता बढ़ाने और दान को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में राजश्री ताम्हनकर एवं सहकलाकारों ने हिंदी और मराठी गीतों का प्रस्तुति कार्यक्रम किया। वंदना जोगळेकर ने कार्यक्रम का सूत्रसंचालन किया।


