पूणे

विचार, नवाचार और तकनीकी के माध्यम से ही भारत आत्मनिर्भर बनेगा:—बीजपी के पूर्व अध्यक्ष श्याम जाजू के विचार

विचार, नवाचार और तकनीकी के माध्यम से ही भारत आत्मनिर्भर बनेगा:—बीजपी के पूर्व अध्यक्ष श्याम जाजू के विचार

एमआईटी डब्ल्यूपीयू में MITSOG की 21वीं बैच का शुभारंभ

 

पुणे: “विचार, नवाचार और तकनीकी के माध्यम से ही भारत आत्मनिर्भर बनेगा। राजनीतिक क्षेत्र में चारित्र्यवान व्यक्तियों की आवश्यकता है, जो समाज को परिपूर्ण बनाएंगे। समाज और देश का संचालन करने के लिए चारित्र्यवान नेतृत्व जरूरी है। राजनीति में कदम रखने वाले विद्यार्थियों को न केवल सामाजिक मुद्दों की समझ होनी चाहिए, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियाँ निभाने के लिए भी तत्पर रहना चाहिए।”

यह विचार भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष श्याम जाजू ने व्यक्त किए।

 

यह अवसर एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी की ओर से एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट द्वारा आयोजित ‘मास्टर्स इन पॉलिटिकल लीडरशिप एंड गवर्नमेंट (एमपीजी)’ 21वीं बैच के शुभारंभ के दौरान प्रमुख अतिथि के रूप में उन्होंने साझा किया।

 

इस अवसर पर पुणे और गोवा बार कौंसिल के अध्यक्ष अ‍ॅड. जयंत जायभावे तथा केंद्रीय लोकसेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डी.पी. अग्रवाल सम्माननीय अतिथि के रूप में उपस्थित थे। साथ ही, एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट के संस्थापक और डब्ल्यूपीयू के कार्याध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड की प्रमुख उपस्थिति रही।

उपस्थित अन्य प्रमुख व्यक्तित्वों में प्रसिद्ध गप्पाष्टककार डॉ. संजय उपाध्ये, एसओजी के प्रोफेसर डॉ. सुधाकर माया परिमल तथा डॉ. अभिजीत ढेरे शामिल थे।

 

इस अवसर पर मान्यवरों ने एमपीजी की पुस्तक तथा डॉ. संजय उपाध्ये की लिखित पुस्तक का प्रकाशन भी किया।

 

श्याम जाजू ने कहा, “जिसे कुछ नहीं आता, वही राजनीतिज्ञ बनता है — यह धारणा अब बदलनी चाहिए। राजनीति में शिक्षित लोग आएं। भारत विश्व की सबसे बड़ी लोकतंत्र है। शैक्षणिक और व्यावहारिक शिक्षा प्रणाली के माध्यम से ही उत्तम नेतृत्व विकसित होगा। एसओजी का शैक्षणिक मॉडल आदर्श है और इसे सरकारी प्रणाली में भी अपनाया जाना चाहिए।”

 

अ‍ॅड. जयंत जायभावे ने कहा, “भारतीय राज्य व्यवस्था लोकतंत्र की आत्मा है। संवाद उसका श्वास है। संविधान हमें अच्छा व्यक्ति और नागरिक बनने के लिए मूल्य देता है। यह मूल्य बच्चों के मन में भी स्थापित होना चाहिए। राजनीतिक करियर के लिए भाषणों का अध्ययन करना आवश्यक है। इससे वैश्विक लोकतंत्र की समझ विकसित होगी। एसओजी के विद्यार्थियों को समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और गणराज्य की अवधारणा समझनी चाहिए।”

 

डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड ने कहा, “राजनीति में शिक्षित और सक्षम लोग आएं, यही जरूरी है। यदि राजनीतिक मंडलों ने प्रशिक्षण लिया तो देश की ब्यूरोक्रेसी और स्थिति सुधारने में समय कम लगेगा। देश के विभिन्न राज्यों में एसओजी का मॉडल लागू है। जैसा भारत में एनएलसी के माध्यम से आमदारों का सम्मेलन आयोजित किया गया, उसी प्रकार अमेरिका में 150 आमदारों के सम्मेलन का आयोजन किया गया। अब देश की पुरानी व्यवस्थाओं का फ्रेमवर्क बदलना आवश्यक है।”

 

डॉ. डी.पी. अग्रवाल ने कहा, “राष्ट्रीय स्तर पर देश की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विद्यार्थियों को गहन अध्ययन और विचार करना चाहिए। एमआईटी द्वारा शुरू किया गया एसओजी का पाठ्यक्रम केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर कार्य करता है। देश को ऐसे नेताओं की आवश्यकता है, जो निष्ठापूर्वक काम करें।”

 

डॉ. संजय उपाध्ये ने कहा, “वर्तमान समय में राजनीतिक पार्टियों में आध्यात्मिकता की कमी है, जिसके कारण नेताओं का सांस्कृतिक स्तर कम हो गया है। एक योग्य नेतृत्व किसी भी क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। एक अच्छा व्यक्ति ही अच्छा नेता बन सकता है।”

देश में शिक्षित व्यक्ति राजनीति में आएं — इस उद्देश्य से स्कूल ऑफ गवर्नमेंट की स्थापना की गई। डॉ. सुधाकर माया परिमल ने MITSOG की स्थापना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य समझाया।

 

इस अवसर पर विद्यार्थियों बी.एस. प्रसन्न और सांगली की तन्वी खाडिलकर ने अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. गौतम बापट ने सूत्रसंचालन किया और डॉ. अभिजीत ढेरे ने आभार व्यक्त किया।

 

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