इटावा

जिस पर आरोप, उसी को जांच — इटावा में डीपीआरओ पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप!

जिस पर आरोप, उसी को जांच — इटावा में डीपीआरओ पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप!

शिकायतकर्ता को नहीं दी जानकारी, फर्जी रिपोर्ट लगा— मुख्यमंत्री से तीसरी बार जांच की मांग

जनपद इटावा के पंचायती राज विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि डीपीआरओ (जिला पंचायती राज अधिकारी) वनवारी सिंह ने स्वयं के खिलाफ दर्ज शिकायतों की जांच रिपोर्ट न केवल झूठी लगाई, बल्कि शिकायतकर्ता को इसकी कोई जानकारी भी नहीं दी गई।

सूत्रों के मुताबिक, जिस अधिकारी पर आरोप है, उसी को जांच की जिम्मेदारी दे दी गई, जिससे पूरे प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं।

“विशाल समाचार” की पड़ताल में सामने आया कि कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप पड़े हैं और फंड का दुरुपयोग लगातार जारी है।

🟥 सूत्रों का दावा — डीपीआरओ की जांच करे केंद्रीय एजेंसियां!

सूत्रों के अनुसार, अगर केंद्रीय एजेंसियां जैसे सीबीआई, ईडी या विजिलेंस टीम जांच करें, तो “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा।

जानकारी के अनुसार, डीपीआरओ वनवारी सिंह अगले चार महीने में रिटायर होने वाले हैं, और इस बीच कई संवेदनशील फाइलों को दबाने के आरोप लग रहे हैं।

🟨 मुख्यमंत्री को दो से तीन बार किया गया निवेदन

“विशाल समाचार” इटावा कार्यालय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से दो से तीन बार पत्र भेजकर निवेदन किया है कि

> “डीपीआरओ वनवारी सिंह के कार्यकाल की सीबीआई, ईडी और विजिलेंस जांच कराई जाए ताकि पंचायतों के विकास फंड में हुए कथित घोटाले का खुलासा हो सके।”

सूत्र बताते हैं कि डीपीआरओ की पूर्व पोस्टिंग में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इस कारण इटावा में नियुक्ति के बाद से ही विवाद गहराता गया है।

 जिला प्रशासन की भूमिका संदिग्ध!

जिला प्रशासन पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर क्यों, जिस अधिकारी पर गंभीर आरोप हैं, उसी को जांच का जिम्मा सौंप दिया गया?

शिकायतकर्ता ने स्पष्ट कहा है —

> “हमें जांच की कोई जानकारी नहीं दी गई। रिपोर्ट पहले से तैयार कर ली गई और सच छुपा लिया गया।”

इस पूरे प्रकरण से जनपद में हड़कंप मचा हुआ है। ग्राम प्रधानों का कहना है कि “जब तक भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, पंचायतों का विकास असंभव है।”

 केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी फाइल!

अगर उत्तर प्रदेश सरकार जांच नहीं करवाती, तो शिकायतकर्ता केंद्र सरकार से मिलकर पूरी फाइल सौंपने की तैयारी में है।

इस मामले ने अब राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। विपक्ष ने भी सवाल उठाया है कि “सरकार पारदर्शिता की बात करती है, पर जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है।”

📍विशाल समाचार की मांग:

1️⃣ डीपीआरओ वनवारी सिंह की तत्काल सीबीआई/ईडी जांच कराई जाए।

2️⃣ फर्जी जांच रिपोर्ट की स्वतंत्र जांच हो।

3️⃣ दोषियों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई हो।

4️⃣ पंचायतों में रुके विकास कार्यों को तत्काल शुरू कराया जाए।

🕵️‍♂️ जनता पूछ रही है —

> “क्या प्रशासनिक अफसरों के संरक्षण में चल रहा है भ्रष्टाचार?”

“क्या यूपी सरकार की छवि खराब करने की साजिश रची जा रही है?”

 

— रिपोर्ट: विशाल समाचार टीम, इटावा

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