10 से अधिक कर्मचारियों वाले सभी संस्थानों में अनिवार्य रूप से बनेगी आन्तरिक परिवाद समिति: इटावा डीपीओ की महत्वपूर्ण सूचना
इटावा विशाल समाचार:
इटावा, जिला प्रोबेशन अधिकारी ने सर्वसाधारण को अवगत कराया है कि मा० उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में विचाराधीन वाद M.A. No. 1688/2023 in Civil Appeal No. 2482/2014 (Aureliano Fernandes Vs State of Goa & Others) के क्रम में दिनांक 12.08.2025 को पारित आदेश का अनुपालन अब अनिवार्य कर दिया गया है।
आदेश के अनुसार सभी शासकीय, अशासकीय, अर्द्धशासकीय कार्यालय, निगम, संस्थान, परिषद, बोर्ड एवं सभी ऐसे प्रतिष्ठान जहां 10 या अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां आन्तरिक परिवाद समिति (Internal Complaints Committee – ICC) का गठन करना अनिवार्य है।
“महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम-2013” के प्राविधानों के अनुसार—
अधिनियम की धारा-4 के तहत प्रत्येक कार्यस्थल का नियोजक लिखित आदेश द्वारा आन्तरिक परिवाद समिति गठित करेगा।
यदि किसी कार्यालय की प्रशासनिक इकाइयाँ भिन्न-भिन्न स्थानों पर स्थित हैं, तो प्रत्येक यूनिट में अलग से समिति का गठन किया जाएगा।
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा-26 में प्रावधान है कि यदि कोई नियोजक आन्तरिक समिति का गठन करने में असफल रहता है तो उस पर अधिकतम ₹50,000 तक का दण्ड लगाया जा सकता है।
उन्होंने सभी सम्बन्धित संस्थानों से अपेक्षा की है कि आदेश का तत्काल अनुपालन करते हुए समिति का गठन सुनिश्चित करें।

