
सर्वसाधारण लोगों को मतदान अधिकार से वंचित करने की साज़िश!
प्रारूप मतदाता सूची पर दर्ज आपत्तियों को गंभीरता से लें : डॉ. हुलगेश चलवादी का आग्रह
पुणे विशाल समाचार संवाददाता
स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनावों के लिए तैयार की जा रही मतदाता सूचियों में गड़बड़ी का सिलसिला अब भी जारी है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रारूप मतदाता सूचियों पर बड़ी संख्या में शिकायतें आ रही हैं। जब तक इन सूचियों में मौजूद त्रुटियाँ और दोहरे नाम दूर नहीं किए जाते, तब तक इनका उपयोग चुनावों में न किया जाए—ऐसी मांग बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव एवं पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन के मुख्य प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी ने रविवार (30 नवंबर) को की।
उन्होंने आरोप लगाया कि आम मतदाताओं को उनके मतदान के अधिकार से वंचित रखने का यह एक सुनियोजित प्रयास है।
डॉ. चलवादी ने बताया कि प्रभाग क्रमांक 2 फुलेनगर-नागपूर चाळ की मतदाता सूची में अन्य प्रभागों के मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं। इस संबंध में पुणे मनपा आयुक्त के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई गई है। उनके अनुसार, “मूल मतदाताओं को मतदान के अधिकार से दूर रखने का यह षड्यंत्र है। मतदाता सूची तैयार करने का काम जिस एजेंसी को दिया गया, उसने अपनी ज़िम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई।”
उन्होंने आगे कहा कि वडगांव शेरी विधानसभा क्षेत्र के एक प्रभाग में शिरूर क्षेत्र के निवासियों के नाम शामिल पाए गए। कई स्थानीय मतदाताओं के नाम अन्य प्रभागों में स्थानांतरित कर उन्हें मतदान से वंचित करने की कोशिश चुनाव आयोग कर रहा है। एक ही परिवार के सदस्यों के नाम भी अलग-अलग प्रभागों में दर्ज किए गए हैं।
डॉ. चलवादी ने आरोप लगाया कि “पहले ईवीएम में गड़बड़ी और अब मतदाता सूची में भारी घोपाल—ये सब राज्य की सत्ता के हित में हो रहा है।”
उन्होंने बताया कि कई मतदाताओं के नाम अलग-अलग प्रभागों में या उसी प्रभाग में एक से अधिक बार दर्ज हैं। राज्य के विभिन्न प्रभागों में दोहरे मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक है, जो चुनाव परिणाम और मतदान प्रतिशत को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रारूप मतदाता सूची पर दर्ज आपत्तियों को राज्य चुनाव आयोग को गंभीरता से लेना चाहिए, नहीं तो बसपा आंदोलन के लिए बाध्य होगी, ऐसा इशारा डॉ. चलवादी ने दिया।
डॉ. चलवादी के अनुसार, केवल मुंबई में ही 11 लाख से अधिक दोहरे मतदाता पाए गए हैं। राज्य की 29 महानगरपालिकाओं का चुनाव कार्यक्रम घोषित हो चुका है, लेकिन जब तक मतदाता सूचियों की गड़बड़ी दूर नहीं होती—तब तक चुनाव कराना नागरिक अधिकारों का हनन होगा।


