सीतामढ़ी

सीतामढ़ी के दो डीसीएलआर ने राज्य में हासिल किया प्रथम स्थान।

सीतामढ़ी के दो डीसीएलआर ने राज्य में हासिल किया प्रथम स्थान।

भूमि विवाद एवं दाखिल–खारिज अपील वादों के निष्पादन में उत्कृष्ट प्रदर्शन।

सीतामढ़ी विशाल समाचार संवाददाता 

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार द्वारा 28–29 नवंबर को पटना में दो दिवसीय कार्यशाला प्रशिक्षण सत्र–सह–समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। अपर मुख्य सचिव, भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग श्री दीपक कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस राज्य स्तरीय समीक्षा में सभी जिलों के भूमि सुधार उप समाहर्ताओं (डीसीएलआर) द्वारा पिछले तीन महीनों में किए गए कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में विभाग के सचिव श्री जय सिंह भी उपस्थित थे।

समीक्षा के दौरान सीतामढ़ी जिला राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ उभरा, जहाँ दो डीसीएलआर ने विभिन्न श्रेणियों में राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त कर जिला प्रशासन की कार्यकुशलता को नए आयाम दिए।

1. बीएलडीआर वादों के निष्पादन में डीसीएलआर पुपरी राज्य में प्रथम

पिछले तीन माह में बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम (BLDR) के अंतर्गत डीसीएलआर पुपरी, डॉ. अनंत द्वारा कुल 55 वादों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया। उनके उत्कृष्ट कार्यों के आधार पर पुपरी अनुमंडल ने पूरे राज्य में पहला स्थान अर्जित किया।

यह उपलब्धि क्षेत्र में भूमि विवादों के त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी निपटारे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

2. दाखिल–खारिज अपील वादों में डीसीएलआर सीतामढ़ी सदर शीर्ष पर

दाखिल–खारिज अपील वादों के निराकरण में डीसीएलआर सीतामढ़ी सदर, श्री अमित राज ने पिछले तीन माह में 1265 मामलों का निष्पादन कर पूरे राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

इतनी बड़ी संख्या में अपील वादों का समयबद्ध निपटारा प्रशासन की प्रतिबद्धता और अधिकारियों की कार्यक्षमता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

3. दाखिल–खारिज अपील वादों में डीसीएलआर पुपरी का राज्य में चौथा स्थान

डीसीएलआर पुपरी, डॉ. अनंत द्वारा दाखिल–खारिज अपील वादों में 375 आदेश पारित किए गए, जिसके आधार पर उन्हें राज्य में चौथा स्थान प्राप्त हुआ।

जिलाधिकारी की सतत मॉनिटरिंग से मिली गति

सीतामढ़ी में भूमि विवादों के शीघ्र एवं पारदर्शी निपटारे को लेकर जिलाधिकारी श्री रिची पांडेय द्वारा लगातार समीक्षा एवं मॉनिटरिंग की जाती रही है। उनकी स्पष्ट प्राथमिकताओं, समयबद्ध लक्ष्य निर्धारण और अधिकारी–कर्मियों को दिए गए त्वरित निर्देशों का यह परिणाम है।

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