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बोगस वोटिंग रोकने के लिए डुप्लीकेट और अवैध मतदाताओं को हटाया जाए

बोगस वोटिंग रोकने के लिए डुप्लीकेट और अवैध मतदाताओं को हटाया जाए

कांग्रेस युवा नेता आमिर शेख, अक्षय जैन और भूषण रणभारे की मांग; वार्ड 38, 21 और 20 की वोटर लिस्ट में बड़ा घोटाला का आरोप

 

पुणे: नगर निगम चुनाव नजदीक आते ही पुणे शहर की मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ियां एक बार फिर सामने आई हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि वार्ड क्रमांक 38 की जांच में 6,500 डुप्लीकेट नाम और करीब 33,500 मतदाताओं के पते या तो गायब हैं या गलत दर्ज किए गए हैं। खास बात यह कि पिछली विधानसभा चुनाव में जिन मतदाताओं के पते ठीक तरह से दर्ज थे, उन्हीं के पते इस बार सूची से हटा दिए गए हैं। इसी तरह, वार्ड 21 में 3,000 से अधिक डुप्लीकेट नाम मिले हैं और 14,000 मतदाताओं के पते पर ‘NA’ (पता उपलब्ध नहीं) का उल्लेख है। वार्ड 20 में भी 1,500 से ज्यादा डुप्लीकेट नाम, अधूरे और गलत पते पाए गए हैं। प्रारंभिक परीक्षण में पूरे शहर में इसी प्रकार की व्यापक त्रुटियां होने की बात सामने आई है।

 

यह आरोप कांग्रेस के युवा नेताओं आमिर शेख, अक्षय जैन और भूषण रणभरे ने संयुक्त रूप से आयोजित पत्रकार परिषद में किए। उन्होंने मांग की कि डुप्लीकेट और अवैध नाम तत्काल हटाए जाएं, अन्यथा निर्वाचन आयोग को सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए। भूषण रणभरे ने कहा, “वार्ड 38 का निवासी और कांग्रेस का सक्रिय कार्यकर्ता होने के नाते मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि वोटर लिस्ट की गलतियां अत्यंत गंभीर हैं। लगभग 33,500 मतदाताओं के पते अधूरे या अस्तित्वहीन हैं, जबकि 6,500 नाम डुप्लीकेट मिले हैं। वार्ड 20 और 21 की स्थिति भी अलग नहीं है। ऐसे गलत पते और दोहराए गए नाम सीधे-सीधे मतदान प्रक्रिया में धांधली को आमंत्रण देते हैं। यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।”

 

अक्षय जैन ने कहा, “जो काम चुनाव आयोग को करना चाहिए, वह हम नागरिकों और कार्यकर्ताओं को करना पड़ रहा है। फिर प्रशासन की वास्तविक जिम्मेदारी क्या है? वोटर लिस्ट तैयार करने में इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी कैसे हुई, इसका स्पष्ट जवाब आयोग को देना चाहिए। नियमों के अनुसार हर साल मतदाता सूची का समरी-रिविजन अनिवार्य है, लेकिन यह प्रक्रिया आयोग द्वारा सही तरीके से की जाती है या नहीं, इस पर बड़ा सवाल है। केंद्रीय चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट का एक्सेस PMC को दिया था, लेकिन हमारी जानकारी के अनुसार यह संवेदनशील एक्सेस एक प्राइवेट कंपनी को सौंपा गया है। क्या यह कानूनी है? यदि यह सच है, तो प्राइवेट कंपनी के माध्यम से सरकार ने मतदाता सूची में फेरबदल किया—ऐसा गंभीर संदेह पैदा होता है। नगर निगम को इस पर तुरंत स्पष्टीकरण देना चाहिए।”

 

आमिर शेख ने कहा, “पिछले 2–3 महीनों से हमारे नेता राहुल गांधी देशभर में मतदाता सूची में हो रहे घोटालों के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। उसी पृष्ठभूमि में जब हमने पुणे के विभिन्न वार्डों की जांच की, तो हजारों डुप्लीकेट नाम, गलत पते और अधूरी एंट्री सामने आईं। सरकार ने जानबूझकर ऐसी स्थिति बनाई है कि भविष्य में चुनाव होंगे भी या नहीं—इस पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। चुनाव न होते हुए भी आयोग कौन-सा काम करता है? प्रशासन सत्ता पक्ष की कठपुतली बन चुका है—यह स्थिति साफ दिखती है। डुप्लीकेट नाम प्रारूप सूची जारी होने के समय ही एक क्लिक में हटाए जा सकते थे, तो फिर ऐसा क्यों नहीं किया गया?”

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