साहित्य अकादमी पुरस्कारों की घोषणा स्थगित करना निंदनीय:- गोपाल दादा तिवारी
— मोदी–शाह सरकार द्वारा साहित्य अकादमी की स्वायत्तता में हस्तक्षेप अस्वीकार्य:— कांग्रेस का तीव्र विरोध
पुणे, विशाल समाचार संवाददाता
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा 18 दिसंबर 2025 को हस्तक्षेप कर साहित्य अकादमी के वर्ष 2025 के पुरस्कारों की प्रस्तावित घोषणा हेतु आयोजित की जाने वाली पत्रकार वार्ता को स्थगित कराना अत्यंत निंदनीय है। यह कदम साहित्यकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, उनकी अस्मिता और साहित्य अकादमी जैसी प्रतिष्ठित स्वायत्त संस्था की स्वायत्तता पर सीधा आघात है। केंद्र की मोदी–शाह सरकार द्वारा किया गया यह राजनीतिक हस्तक्षेप कांग्रेस पार्टी कड़े शब्दों में निंदित करती है। यह बात महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने कही।
उन्होंने कहा कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा 12 मार्च 1954 को विभिन्न भारतीय भाषाओं और साहित्य के संवर्धन हेतु साहित्य अकादमी की स्थापना एक स्वायत्त (Autonomous) संस्था के रूप में की गई थी। इसका औपचारिक उद्घाटन तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने किया था। साहित्य, कला और संस्कृति के विकास में साहित्य अकादमी की भूमिका ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
साहित्य अकादमी प्रतिवर्ष विभिन्न भारतीय भाषाओं की उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों को अपने पुरस्कारों से सम्मानित करती रही है। यह संस्था भारत की सांस्कृतिक और भाषाई एकता का प्रतीक है तथा भारतीय साहित्य के संरक्षण और विकास में इसका योगदान अविस्मरणीय है। अकादमी का प्रमुख उद्देश्य देश की बहुभाषिक साहित्यिक परंपरा का संवर्धन है, किंतु केंद्र सरकार द्वारा पहली बार इसमें व्यवधान डाला गया है।
मंत्रालय द्वारा अकादमी को भेजे गए नोट में कहा गया कि वर्ष 2025–26 के पुरस्कारों की पुनर्रचना मंत्रालय की सलाह से की जाए। यह अत्यंत चौंकाने वाला और अस्वीकार्य है। पिछले 70 वर्षों के इतिहास में ऐसा हस्तक्षेप पहली बार हुआ है। मंत्रालय द्वारा तथाकथित और गैर-प्रासंगिक MoU की धाराओं का हवाला देकर पुरस्कारों की घोषणा रोके जाने का आरोप भी श्री तिवारी ने लगाया।
इस दबाव के चलते साहित्य अकादमी की कार्यकारी परिषद को घोषणा स्थगित करनी पड़ी। अनेक वरिष्ठ साहित्यकारों ने इसे पुरस्कार प्रक्रिया पर सरकार द्वारा ‘वेटो पावर’ हासिल करने का प्रयास बताते हुए तीव्र विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री माधव कौशिक द्वारा स्पष्टीकरण हेतु किए गए कॉल और संदेशों का संस्कृति मंत्रालय द्वारा तत्काल कोई उत्तर न दिया जाना भी खेदजनक और असंवेदनशील रवैये को दर्शाता है।
श्री तिवारी ने याद दिलाया कि मराठी साहित्य ने राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान प्राप्त कर भारतीय साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वि. स. खांडेकर, पु. ल. देशपांडे, शिवाजी सावंत, दुर्गा भागवत, गंगाधर गाडगीळ, भालचंद्र नेमाडे, नामदेव ढसाल, संजय पवार सहित अनेक महान साहित्यकारों को साहित्य अकादमी पुरस्कार और फेलोशिप से सम्मानित किया जा चुका है।
कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि केंद्र सरकार साहित्य अकादमी की स्वायत्तता में हस्तक्षेप बंद करे, पुरस्कार प्रक्रिया पर किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव न डाले और तत्काल स्थगित की गई घोषणा को बिना शर्त बहाल करे। साहित्य और संस्कृति पर नियंत्रण की मानसिकता लोकतंत्र के लिए घातक है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।



