पूणे

महापुरुष और संत किसी जाति के नहीं, बल्कि पूरे देश के होते हैं

महापुरुष और संत किसी जाति के नहीं, बल्कि पूरे देश के होते हैं

आचार्य प्रो. रतनलाल सोंगरा को एमआईटी–एमईआरएस एमआईटी की ओर से भावपूर्ण श्रद्धांजलि

पुणे, विशाल समाचार:

“महापुरुष और संत किसी एक जाति के नहीं होते, वे पूरे राष्ट्र की धरोहर होते हैं। ज्ञानेश्वरी से लेकर भगवान बुद्ध के सिद्धांतों तक का गहन अध्ययन करने वाले विद्वान आचार्य प्रो. रतनलाल सोंगरा बहुआयामी, बहुभाषी और बहुज्ञानी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने पंचशील और पसायदान के बीच सेतु स्थापित किया। वे जाति और धर्म की सीमाओं से परे थे। महात्मा फुले और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के आंदोलन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनका परिवार भारतीय संविधान के मूल्यों का सजीव उदाहरण है। उनके निधन से साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।”

ये भाव श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने व्यक्त किए।

एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी तथा एमईआरएस एमआईटी शिक्षण संस्था समूह की ओर से कोथरुड स्थित डब्ल्यूपीयू के ज्ञानेश्वर हॉल में आचार्य प्रो. रतनलाल सोंगरा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

इस अवसर पर मराठी साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. श्रीपाल सबनीस, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उल्हासदादा पवार, एमआईटी डब्ल्यूपीयू के संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड सहित राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक एवं पत्रकारिता जगत के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। साथ ही आचार्य प्रो. सोंगरा की पंच कन्याएं एवं उनका संपूर्ण परिवार भी उपस्थित रहा।

उल्हास पवार ने कहा, “प्रो. सोंगरा के विचार एक वैचारिक भोज की तरह होते थे। उनमें गहरी वैचारिक शक्ति थी। वे बहुआयामी, बहुभाषी और बहुज्ञानी व्यक्तित्व के स्वामी थे। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से शोषित समाज के दुःख और संघर्ष को स्वर दिया। उनके साहित्य में उपन्यास, कहानी-संग्रह और कविताएं शामिल हैं। उनका साहित्य सर्वस्पर्शी था।”

प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, “वे अत्यंत निर्मल और प्रांजल व्यक्तित्व के धनी थे। चेहरे पर सदैव मुस्कान के साथ उन्होंने जीवन जिया। उनके आकस्मिक निधन से मुझे और संस्था को ऐसी क्षति हुई है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को चिरशांति प्रदान हो।”

डॉ. श्रीपाल सबनीस ने कहा, “जाति और धर्म से परे इस व्यक्तित्व ने ज्ञानेश्वरी से लेकर भगवान गौतम बुद्ध के सिद्धांतों का सच्चे अर्थों में अध्ययन किया। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से स्थापित व्यवस्था के विरुद्ध आक्रोश और समता की आकांक्षा को अभिव्यक्त किया।”

इसके पश्चात लोकमत समूह के संपादक विजय बाविस्कर, वरिष्ठ पत्रकार अरुण खोरे, नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु डॉ. एस. एन. पठान, एकनाथ गायकवाड़, सरकार निंबाळकर, विलास तांदळे, प्रेमसुख सोंगरा, भगवान वैराट, आरती सोंगरा, भारती सोंगरा, एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कुलगुरु डॉ. आर. एम. चिटणीस, डॉ. संजय उपाध्ये एवं डॉ. महेश थोरवे ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए आचार्य रतनलाल सोंगरा की स्मृतियों को साझा किया।

इस अवसर पर एमईआरएस एमआईटी शिक्षण संस्था समूह के कुलसचिव डॉ. रत्नदीप जोशी, शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने आचार्य प्रो. रतनलाल सोंगरा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

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