
हाफ एनकाउंटर पर हाईकोर्ट सख्त, कहा– सजा देना न्यायपालिका का काम
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान: प्रयागराज उत्तर प्रदेश
दिनांक:1 फरवरी 2026
प्रयागराज :इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा किए जा रहे तथाकथित “हाफ एनकाउंटर” पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी आरोपी को सजा देने का अधिकार केवल न्यायपालिका को है, पुलिस को नहीं। अदालत ने इसे कानून के शासन और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां संविधान के अनुसार ही शासन चलाया जाना चाहिए, जिसमें विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की भूमिका स्पष्ट रूप से निर्धारित है। पुलिस अधिकारियों को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। आरोपी के हाथ या पैर में गोली मारने जैसी घटनाएं भी अस्वीकार्य हैं।
अदालत ने हाल के दिनों में छोटी-छोटी आपराधिक घटनाओं, जैसे चोरी या लूट के मामलों में भी पुलिस द्वारा मुठभेड़ के नाम पर गोली चलाने की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई। पीठ ने कहा कि कई मामलों में पुलिसकर्मियों को चोट तक नहीं आती, जिससे संदेह उत्पन्न होता है।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने निर्देश दिए कि मुठभेड़ में मृत्यु या गंभीर चोट की स्थिति में तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाए। जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, जैसे सीबीसीआईडी या अन्य थाने की टीम से कराई जाए। घायल व्यक्ति का बयान मजिस्ट्रेट या चिकित्सकीय अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाना अनिवार्य होगा।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों को किसी प्रकार का पुरस्कार या पदोन्नति नहीं दी जाएगी। यदि निर्देशों का उल्लंघन हुआ तो संबंधित मुठभेड़ टीम के साथ-साथ जिले के पुलिस प्रमुख (एसएसपी/एसपी/कमिश्नर) को भी अवमानना का दोषी माना जाएगा।
इस मामले में हाईकोर्ट ने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद और पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा को तलब कर जवाब मांगा था। दोनों अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का भरोसा दिलाया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


