
देश में बढ़ते सड़क हादसों पर सख्त कदम उठाने की जरूरत: प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे। देश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों की गंभीर समस्या पर सरकार को तत्काल ध्यान देकर कठोर कदम उठाने चाहिए। यह मांग सांसद प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी ने संसद में शून्यकाल के दौरान उठाई। उन्होंने कहा कि लापरवाह वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग करना तथा सोशल मीडिया के लिए सड़कों और हाईवे पर रील या फोटोशूट करना दुर्घटनाओं के नए और चिंताजनक कारण बनते जा रहे हैं।
प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी ने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में देश में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 1.78 लाख लोगों की मौत हुई है। यानी हर दिन सैकड़ों परिवार इस त्रासदी का सामना कर रहे हैं। विशेष रूप से 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत होने से स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में भी सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति चिंताजनक है। राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2024 में 36,084 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 15,335 लोगों की मौत हुई। पुणे शहर में भी दुर्घटनाओं के मामले बढ़े हैं। पुणे पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में 1,404 सड़क हादसों में 320 लोगों की मौत हुई और 1,320 लोग घायल हुए, जबकि वर्ष 2023 में हादसों की संख्या 1,230 थी।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के लिए सड़कों और हाईवे पर रील या फोटोशूट करने की बढ़ती प्रवृत्ति से यातायात में बाधा उत्पन्न होती है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत शराब पीकर वाहन चलाने और लापरवाही से ड्राइविंग करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है, लेकिन कई जगह इसका प्रभावी पालन नहीं हो रहा है।
इस संदर्भ में उन्होंने मांग की कि शराब पीकर वाहन चलाने और खतरनाक ड्राइविंग के मामलों में न्यूनतम कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए। साथ ही सड़क हादसों से जुड़े मौत के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित की जाएं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्पीड डिटेक्शन सिस्टम, ब्रीथ एनालाइजर और सीसीटीवी के व्यापक उपयोग की भी मांग की।
इसके अलावा मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे जैसे हाई-स्पीड मार्गों पर दुर्घटना संभावित स्थानों का नियमित सुरक्षा ऑडिट किया जाए। स्कूलों और कॉलेजों में सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार ड्राइविंग के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं तथा सड़क हादसों के पीड़ितों और उनके परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।



