
गौरी जोशी और डॉ. अमृता चांदोरकर को मिलेगा महिला उद्यमी पुरस्कार 2026
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे। शुक्ल यजुर्वेदीय माध्यंदिन महाराष्ट्रीय ब्राह्मण केंद्रीय मंडल के उपक्रम ‘याज्ञवल्क्य उद्योजक विकास अभियान (युवा)’ की ओर से महिला उद्यमी पुरस्कार 2026 वितरण समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस समारोह में ‘स्वयंसिद्धा पुरस्कार’ जी.आर. इंजीनियरिंग की संचालिका गौरी जोशी को तथा ‘युवा उद्यमी पुरस्कार’ निरामय वेलनेस की संचालिका डॉ. अमृता चांदोरकर को प्रदान किया जाएगा। यह जानकारी संस्था के माणिक सुपेकर ने पत्रकार परिषद में दी।
पत्रकार परिषद में संस्था की प्रतिभा संगमनेरकर, डॉ. स्वाती कुलकर्णी, श्रीकांत जोशी, उपेंद्र केळकर और मंजुषा वैद्य उपस्थित थे।
यह समारोह सेनापति बापट रोड स्थित मराठा चेंबर ऑफ कॉमर्स के सुमंत मुळगावकर सभागार में शनिवार, 14 मार्च को शाम 6 बजे आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यसभा सांसद प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी करेंगी, जबकि पुणे की महापौर मंजुषा नागपुरे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।
‘युवा’ उपक्रम के अंतर्गत कै. सौ. सावित्रीबाई नारायण जोशी की स्मृति में स्वयंसिद्धा पुरस्कार तथा कै. मनोरमा शामराव कुंभोजकर की स्मृति में युवा उद्यमी पुरस्कार प्रदान किया जाता है। पुरस्कार में सम्मानचिन्ह और मानपत्र प्रदान किए जाएंगे।
जीआर इंजीनियर्स कंपनी की संस्थापिका व संचालिका गौरी जोशी अपारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत हैं और उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में इस क्षेत्र से जुड़े कई प्रकल्प स्थापित किए हैं। वहीं निरामय वेलनेस सेंटर के माध्यम से पिछले दो दशकों से अनेक रोगियों को बिना स्पर्श उपचार पद्धति के जरिए विभिन्न बीमारियों से राहत देने के लिए डॉ. अमृता चांदोरकर को उनके उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत व्यवसायिक और नौकरीपेशा महिलाओं के लिए ‘व्यावसायिक कार्य में शिष्टाचार’ विषय पर एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया है, जिसमें डॉ. जयश्री फडणवीस मार्गदर्शन देंगी।
यह कार्यक्रम सभी के लिए निःशुल्क खुला रहेगा और पुणे के नागरिकों से बड़ी संख्या में उपस्थित रहने की अपील की गई है। शुक्ल यजुर्वेदीय माध्यंदिन महाराष्ट्रीय ब्राह्मण केंद्रीय मंडल की स्थापना वर्ष 1940 में हुई थी, जबकि ‘युवा’ उपक्रम की शुरुआत वर्ष 2004 में स्वर्गीय चंद्रकांत जोशी के नेतृत्व में पंढरपुर में आयोजित अधिवेशन के दौरान की गई थी।



