
श्री स्वामी समर्थ के सूर्यमणि और पादुकाओं के दर्शन पुणे में पहली बार
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे : श्री स्वामी समर्थ महाराज के जीवन और उनकी दिव्य लीलाओं से जुड़ी अनेक पवित्र वस्तुएँ आज भी भक्तों की आस्था का केंद्र हैं। इनमें सबसे विशेष और दिव्य मानी जाने वाली वस्तु सूर्यमणि है। अब यही श्री स्वामी समर्थ का सूर्यमणि और उनकी पवित्र पादुकाओं के दर्शन सामान्य भक्तों को पुणे में प्राप्त होंगे। विशेष बात यह है कि इतिहास में पहली बार इन दोनों का दर्शन अक्कलकोट के राजवाड़े के बाहर पुणे में भक्तों के लिए उपलब्ध होगा। यह जानकारी अक्कलकोट के राजा श्रीमंत मालोजीराजे संयुक्ताराजे भोसले (तृतीय) ने पत्रकार परिषद में दी।
पत्रकार परिषद में डॉ. महेश नामपूरकर भी उपस्थित थे।
श्री अक्कलकोट राजघराना छत्री ट्रस्ट, सोलापुर के माध्यम से आयोजित “श्री स्वामी समर्थ सूर्यमणि व पादुका दर्शन सोहळा” का आयोजन 17 और 18 मार्च 2026 को शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक तथा 19 मार्च 2026 को सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक एरंडवणे डीपी रोड स्थित सिद्धी साज बैंक्वेट, पुणे में किया जाएगा।
इस दर्शन सोहळे की शुरुआत 17 मार्च को दोपहर 4 बजे पुणे के श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर से होगी, जहाँ सूर्यमणि और पादुकाओं को बाप्पा के दर्शन के लिए लाया जाएगा। इसके बाद यह पवित्र यात्रा लक्ष्मीबाई दगडूशेठ हलवाई दत्त मंदिर, अक्कलकोट स्वामी समर्थ मठ तथा सारसबाग स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर में दर्शन कर कार्यक्रम स्थल तक पहुँचेगी।
इस अवसर पर जानकारी देते हुए श्रीमंत मालोजीराजे संयुक्ताराजे भोसले (तृतीय) ने बताया कि स्वामी समर्थ की अनेक चित्रों और प्रतिमाओं में स्वामी महाराज अपने दो अंगुलियों के बीच एक तेजस्वी मणि धारण किए हुए दिखाई देते हैं। यही पवित्र मणि सूर्यमणि है, जिसे स्वामी की दिव्य शक्ति, आध्यात्मिक तेज और कृपा का प्रतीक माना जाता है।
उन्होंने बताया कि स्वामी समर्थ महाराज ने अपने जीवनकाल में भक्तों के कल्याण, उनके दुःखों के निवारण और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए अनेक चमत्कारिक लीलाएँ कीं। उन दिव्य लीलाओं की स्मृति का साक्षी यह सूर्यमणि माना जाता है।
परंपरा के अनुसार यह सूर्यमणि स्वयं श्री स्वामी समर्थ महाराज ने अक्कलकोट के राजघराने को प्रदान किया था। तभी से यह दिव्य धरोहर अत्यंत श्रद्धा और संरक्षण के साथ अक्कलकोट राजघराने में सुरक्षित रखी गई है। भक्तों की मान्यता है कि इस सूर्यमणि में आज भी स्वामी समर्थ की कृपा और दिव्य उपस्थिति का अनुभव होता है।
श्रीमंत मालोजीराजे ने कहा कि भक्तों की आस्था के अनुसार इस सूर्यमणि में सूर्य के समान तेज और आध्यात्मिक शक्ति का अद्भुत प्रतिबिंब है। इसके दर्शन से भक्तों को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और गहरी भक्ति का अनुभव होता है।
पुणे में आयोजित यह पवित्र दर्शन सोहळा 20 मार्च को मनाए जाने वाले श्री स्वामी समर्थ प्रकट दिन के पूर्व आयोजित किया जा रहा है। इस कारण हजारों भक्तों को स्वामी समर्थ की कृपा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
इस वर्ष यह आयोजन हिंदू नववर्ष के पावन अवसर के कारण और भी विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस अवसर पर भक्तों को केवल सूर्यमणि और पादुकाओं के दर्शन ही नहीं बल्कि एक बड़े आध्यात्मिक उपक्रम से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।
इसी क्रम में “अनुभूति (Anubhuti)” नामक आध्यात्मिक परियोजना के माध्यम से स्वामी भक्तों को एक विशेष उपक्रम में भाग लेने का निमंत्रण दिया गया है। इस परियोजना के अंतर्गत भक्तों को स्टूडियो अपार्टमेंट की आंशिक (पार्शियल) मालिकी के माध्यम से सहभागी बनने का अवसर दिया जा रहा है।
इस परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए श्रीमंत मालोजीराजे ने कहा कि इस पवित्र अवसर पर सभी स्वामी भक्तों को “अनुभूति” आध्यात्मिक विकास परियोजना से जुड़ने का अवसर दिया जा रहा है। इस उपक्रम के माध्यम से भक्त अक्कलकोट के विकास और स्वामी समर्थ की सेवा में अपना योगदान दे सकेंगे।
इस परियोजना से प्राप्त होने वाली निधि का उपयोग अक्कलकोट शहर के विकास, धार्मिक एवं आध्यात्मिक सुविधाओं के निर्माण तथा भाविकों के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत भक्तों को टाइम-शेयर पद्धति से स्टूडियो अपार्टमेंट का लाभ मिलेगा, जिसका उपयोग भविष्य में उनके परिवार के सदस्य भी कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए आवश्यक दान राशि को आम भक्तों की पहुंच में रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक स्वामी भक्त इस पवित्र उपक्रम का हिस्सा बन सकें।
स्वामी समर्थ की कृपा का यह दिव्य प्रतीक सूर्यमणि और स्वामी द्वारा उपयोग की गई पादुकाओं के दर्शन भक्तों के लिए केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि स्वामी समर्थ की दिव्य ऊर्जा से जुड़ने का एक आध्यात्मिक अनुभव होगा।
इस दर्शन सोहळे के दौरान आरती, अभिषेक, होम–हवन तथा विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न होंगे, जिससे भक्तों को पूर्ण आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव मिलेगा। इस कार्यक्रम के लिए सुरेखा उत्तमराव बहिरट पाटील ने स्थल प्रायोजन स्वीकार किया है।
अंत में सभी पुणेकरों और स्वामी भक्तों से अपील की गई है कि वे बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इतिहास में पहली बार पुणे में आयोजित इस पवित्र सूर्यमणि और पादुका दर्शन का लाभ प्राप्त करें।



