
यशवंतराव की दूरदृष्टि से मराठी नाटकों पर नहीं लगा मनोरंजन कर : सतीश आळेकर
यशवंतराव चव्हाण कला-साहित्य पुरस्कार समारोह संपन्न, 40 वर्षों से काव्य सम्मेलन की परंपरा कायम
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे : वरिष्ठ नेता यशवंतराव चव्हाण ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में मराठी नाटकों पर मनोरंजन कर नहीं लगाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। उनके इस दूरदर्शी निर्णय का लाभ आज भी मराठी रंगमंच को मिल रहा है। यह विचार वरिष्ठ नाटककार, निर्देशक और अभिनेता सतीश आळेकर ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कला और साहित्य के प्रति यशवंतराव चव्हाण की संवेदनशीलता और दूरदृष्टि के कारण मराठी नाट्यसृष्टी को लंबे समय तक लाभ मिला।
वे स्व. प्रकाश ढेरे चैरिटेबल ट्रस्ट और गंगा लॉज मित्र मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 40वें काव्य सम्मेलन और यशवंतराव चव्हाण कला-साहित्य पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ढेरे परिवार द्वारा लगातार 40 वर्षों से काव्य सम्मेलन की परंपरा को कायम रखना अत्यंत प्रेरणादायक है।
इस समारोह में वरिष्ठ अभिनेता, निर्देशक और निर्माता महेश कोठारे को यशवंतराव चव्हाण कला जीवनगौरव पुरस्कार तथा प्रसाद गावडे को अजितदादा सामाजिक कार्य पुरस्कार प्रदान किया गया। दोनों पुरस्कारों में 51 हजार रुपये नकद और स्मृतिचिह्न प्रदान किया गया।
इसके अलावा यशवंतराव चव्हाण साहित्य पुरस्कार प्रेषित प्रदीप सिद्धभट्टी (बुलढाणा) को उनके काव्यसंग्रह “विस्मरणाच्या आरण्यात”, अविनाश पोईनकर (चंद्रपुर) को “दंडकारण्य” तथा प्रतिभा पवार-खैरनार (नाशिक) को उनके काव्यसंग्रह “वंशावळीच्या प्राचीन सरीतून” के लिए प्रदान किया गया। इस पुरस्कार का स्वरूप प्रत्येक के लिए 11,001 रुपये नकद और स्मृतिचिह्न रखा गया था।
टिळक स्मारक मंदिर में आयोजित इस समारोह में वरिष्ठ व्यंग्यकार रामदास फुटाणे, वरिष्ठ कवि अशोक नायगावकर, नीलिमा कोठारे, राष्ट्रवादी कांग्रेस के पुणे शहराध्यक्ष सुनील टिंगरे, आयोजक और ट्रस्ट के विजय ढेरे, संजय ढेरे, ट्रस्ट के गौरव फुटाणे, मित्र मंडल के सचिन जाधव, कुणाल जाधव, नगरसेवक व पूर्व महापौर दत्तात्रेय धनकवडे, पूर्व विधायक मोहन जोशी सहित अनेक मान्यवर उपस्थित थे।
सतीश आळेकर ने अपने संबोधन में यशवंतराव चव्हाण और प्रकाश ढेरे की स्मृतियों को याद करते हुए कहा कि अपने लेखन जीवन के शुरुआती दौर में उन्हें दोनों से जुड़ने का अवसर मिला था। दिल्ली में मराठी नाटकों के प्रयोग होते थे, तब मराठी नेताओं द्वारा कलाकारों का विशेष स्वागत और आतिथ्य किया जाता था। इसी दौरान उनकी यशवंतराव चव्हाण से मुलाकात हुई थी। बाद में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने मराठी रंगभूमि के लिए मनोरंजन कर माफ करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया, जिसका लाभ आज भी मराठी नाट्यसृष्टी को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यशवंतराव चव्हाण केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि एक अच्छे पाठक और कला-रसिक भी थे।
महेश कोठारे ने कहा कि यशवंतराव चव्हाण के नाम से दिया जाने वाला पुरस्कार मिलना उनके लिए बड़ा सम्मान है, विशेष रूप से तब जब यह पुरस्कार उस ट्रस्ट द्वारा दिया गया है जिसका संबंध गंगा लॉज से है, जहाँ से 1975 में उनकी फिल्मी यात्रा की शुरुआत हुई थी। उन्होंने बताया कि उनके गुरु समान आण्णासाहेब देऊळगावकर का कार्यालय भी गंगा लॉज के नीचे ही स्थित था, जहाँ से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी।
प्रसाद गावडे ने कहा कि वे कोकण के प्राकृतिक वातावरण में रहकर सामाजिक कार्य कर रहे हैं। कोकण के गाँवों में आज भी लोग प्रकृति और पर्यावरण के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीते हैं। यह जीवनशैली आधुनिक तथाकथित विकास की देन नहीं, बल्कि परंपरा और प्रकृति से जुड़े जीवन मूल्यों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अजितदादा पवार के नाम का यह पुरस्कार उनके लिए विशेष महत्व रखता है।
कार्यक्रम की प्रस्तावना में वरिष्ठ व्यंग्यकार रामदास फुटाणे ने कहा कि कवियों को आम लोगों के जीवन, उनकी समस्याओं और पीड़ा का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। इसी उद्देश्य से इस कार्यक्रम को काव्य सम्मेलन का स्वरूप दिया गया है और पिछले 40 वर्षों से इसे निरंतर आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कवियों ने अपनी परंपरा निभाई है, उसी प्रकार श्रोताओं ने भी अपनी रसिकता बनाए रखी है।
इस अवसर पर अंजली कुलकर्णी ने साहित्य पुरस्कार प्राप्त कवियों का परिचय कराया, जबकि राजेश्वरी थोरवे ने कार्यक्रम का संचालन किया। अंत में विजय ढेरे ने सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।
काव्य मैफिल ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध
काव्य सम्मेलन की शुरुआत रामदास फुटाणे की समकालीन परिस्थितियों पर आधारित कविता से हुई। इसके बाद मधुरा उमरीकर की स्त्री शोषण पर आधारित कविता, गुंजन पाटील की स्त्री सशक्तिकरण पर केंद्रित कविता, अविनाश पोईनकर की आदिवासी समाज के जीवन पर आधारित रचना, यामिनी दळवी की धार्मिक परिस्थितियों पर आधारित कविता, प्रशांत मोरे की दुष्काळ की पीड़ा व्यक्त करने वाली कविता और कल्पना दुधाळ की किसान जीवन पर आधारित कविता ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।
भरत दौंडकर, अशोक नायगावकर, महेश केळुसकर, शशिकांत तिरोडकर और अनिल दीक्षित सहित अन्य कवियों की रचनाओं ने भी श्रोताओं को कभी हँसाया तो कभी भावुक कर दिया। रामदास फुटाणे ने समकालीन विषयों पर अपनी व्यंग्यात्मक वात्रटिका प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को खूब गुदगुदाया।
इस काव्य सम्मेलन में राज्यभर के नामचीन कवियों ने भाग लिया, जिनमें अशोक नायगावकर (मुंबई), महेश केळुसकर (फोंडा), वैशाली पतंगे (कुंभारगाव), प्रेषित प्रदीप सिद्धभट्टी (बुलढाणा), अविनाश पोईनकर (चंद्रपुर), यामिनी दळवी (मुंबई), प्रतिभा खैरनार (नाशिक), प्रशांत मोरे (कल्याण), कल्पना दुधाळ (बोरी भडक), मधुरा उमरीकर (परभणी), अविनाश कोठावडे (संभाजीनगर), अरुण पवार (परळी वैजनाथ), भरत दौंडकर (निमगाव म्हाळुंगी), अंजली कुलकर्णी (पुणे), अनिल दीक्षित (पिंपरी-चिंचवड), शशिकांत तिरोडकर (कोकण) और गुंजन पाटील (सोयगाव) शामिल थे।
कार्यक्रम में गंगा लॉज मित्र मंडल के सचिन जाधव और शिकागो मराठी मंडल के अध्यक्ष माधव गोगावले ने भी अपनी कविताएँ प्रस्तुत कीं।

