
कराटे अभ्यास के दौरान लगी चोट से खुला राज: पुणे में 10 वर्षीय बच्ची के स्वादुपिंड की दुर्लभ गांठ का सफल ऑपरेशन
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे: पुणे के बाणेर स्थित Manipal Hospital Baner में डॉक्टरों की टीम ने 10 वर्षीय एक बच्ची के स्वादुपिंड (पैंक्रियास) में पाई गई दुर्लभ गांठ का सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर उसे नया जीवन दिया। यह मामला इसलिए भी विशेष माना जा रहा है क्योंकि इतनी कम उम्र में इस प्रकार की बीमारी का पाया जाना बेहद दुर्लभ होता है। उपचार के बाद बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ होकर दोबारा स्कूल जाने लगी है।
डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची के शरीर में इस गांठ के कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे। लेकिन स्कूल में कराटे के अभ्यास के दौरान उसके पेट में चोट लगने के बाद जांच कराई गई, जिसमें यह समस्या सामने आई। आगे की जांच में स्वादुपिंड में सॉलिड स्यूडोपैपिलरी नियोप्लाज्म (SPN) नामक दुर्लभ ट्यूमर का पता चला।
चिकित्सकों के अनुसार यह स्वादुपिंड का एक दुर्लभ और अपेक्षाकृत कम आक्रामक प्रकार का ट्यूमर होता है। यदि समय रहते इसे पूरी तरह निकाल दिया जाए तो मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना बहुत अधिक होती है। आंकड़ों के अनुसार स्वादुपिंड की कुल गांठों में इस बीमारी की हिस्सेदारी केवल 1 से 3 प्रतिशत होती है और लगभग 10 लाख लोगों में से केवल एक व्यक्ति में यह रोग पाया जाता है। यह रोग सामान्यतः किशोरावस्था से 30 वर्ष तक की महिलाओं में अधिक देखा जाता है, जबकि छोटे बच्चों में इसका पाया जाना अत्यंत दुर्लभ है।
बच्ची में इस बीमारी के कोई लक्षण न होने के कारण परिवार को इस निदान से बड़ा झटका लगा। ऑपरेशन से पहले परिवार ने कई अस्पतालों में विशेषज्ञों से सलाह भी ली।
इस मामले के बारे में जानकारी देते हुए सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख और वरिष्ठ सर्जन Dr. Amit Parasnis ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान स्वादुपिंड की संरचना का सावधानीपूर्वक निरीक्षण करने के बाद सेंट्रल पैनक्रियेक्टॉमी करने का निर्णय लिया गया। इस तकनीक की मदद से डुओडेनम (छोटी आंत का प्रारंभिक भाग) और स्वादुपिंड का महत्वपूर्ण हिस्सा सुरक्षित रखा जा सका तथा बड़ी और जटिल व्हिपल प्रक्रिया से बचा गया।
उन्होंने बताया कि स्वादुपिंड शरीर की महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं के बेहद करीब स्थित होता है और छोटे बच्चों में अधिक रक्तस्राव का खतरा रहता है, इसलिए यह शल्यक्रिया तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण थी। इसके बावजूद डॉक्टरों की टीम ने अत्यंत कम रक्तस्राव के साथ ट्यूमर को सुरक्षित रूप से निकाल दिया और स्वादुपिंड के कार्य को भी सुरक्षित रखा।
डॉक्टरों के अनुसार स्वादुपिंड की कई गांठें लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के शरीर में मौजूद रह सकती हैं और अक्सर अन्य कारणों से की गई जांच में ही उनका पता चलता है। ऐसे दुर्लभ रोगों के उपचार में समय पर जांच और विभिन्न विशेषज्ञों की टीम द्वारा समन्वित इलाज बेहद महत्वपूर्ण होता है।
इस मामले में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के डॉ. अमित पारसनीस के साथ एनेस्थेसियोलॉजिस्ट Dr. Ashish Pathak, पीडियाट्रिक इंटेंसिविस्ट Dr. Pooja Gire तथा अन्य विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम ने मिलकर सफलतापूर्वक यह शल्यक्रिया की।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जीते हुए दोबारा अपनी पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों में लौट आई है।



