
*रामनाम के गूंज में भक्तिमय श्रीराम जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ संपन्न*
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान :पुणे महाराष्ट्र
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पावन जन्मोत्सव के अवसर पर श्रीराम सेवा समिति की ओर से पुणे में अत्यंत भक्तिमय, आध्यात्मिक और उत्साहपूर्ण वातावरण में श्रीराम जन्मोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ के अखंड नामस्मरण से पूरा परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया। इस दिव्य आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उपस्थित रहकर भक्ति का आनंद लिया।
अल्पबचत भवन में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधियों के साथ हुई। मान्यवरों के करकमलों द्वारा भगवान श्रीराम का विधिवत पूजन किया गया। इस अवसर पर ईश्वरचंद गोयल, जयभगवान गोयल, पवन बंसल, पवन चमड़िया, गुंजन नवाल, नरेंद्र गोयल, प्रेम मित्तल, सतीश अग्रवाल, योगेश जैन, पवन सराफ, आनंद अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, रितेश अग्रवाल, गीता गोयल, रुचि गोयल, राजेश मित्तल, सुनीता बंसल, नंदलाल पूरनचंद, द्वारका जालन सहित पुणे एवं पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्र के समाजबंधु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
इसके पश्चात हरियाणा की सुप्रसिद्ध भजन गायिका प्रियंका चौधरी एवं गायक अरविंद अग्रवाल ने अपने सुमधुर भजनों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उनके भजनों में प्रभु श्रीराम की महिमा का भावपूर्ण वर्णन था, जिसने श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति का अनुभव कराया। ‘लोगों का हमें काम है करना, उनको ऊंचा उठाना है’ जैसे संदेशपूर्ण भजन के माध्यम से उन्होंने समाजसेवा का प्रेरक संदेश भी दिया।
कार्यक्रम में भगवान श्रीराम के परम भक्त बजरंगबली हनुमान का आकर्षक प्रस्तुतीकरण विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। हनुमान के वेश में मंच पर आए कलाकार ने भक्तों में ऊर्जा और श्रद्धा का संचार किया। साथ ही राधा-कृष्ण के पवित्र प्रेम पर आधारित प्रस्तुतियां तथा गीते पद्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण गीतों ने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया।
विशेष रूप से रक्षाबंधन की भावना पर आधारित गीत—“मुझे त्रिलोक की संपदा नहीं चाहिए, बस ऐसा एक भाई मिले जिसकी कलाई पर राखी बांध सकूं”—ने सभी को भावुक कर दिया। इस प्रस्तुति से विशेषकर महिलाओं की आंखें नम हो गईं और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की भावना और गहरी हो गई।
कार्यक्रम का समापन भगवान श्रीराम की मंगल आरती के साथ हुआ, जिसके पश्चात श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया। इस संपूर्ण आयोजन ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मकता का संचार किया।
यह श्रीराम जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन न होकर समाज में एकता, सेवा और संस्कारों का संदेश देने वाला प्रेरणादायी आध्यात्मिक उत्सव सिद्ध हुआ।


