पूणेमहाराष्ट्र

रमेश घोलप का संघर्ष और व्यक्तित्व सभी के लिए प्रेरणादायक

रमेश घोलप का संघर्ष और व्यक्तित्व सभी के लिए प्रेरणादायक

रिपोर्ट: विशाल समाचार

स्थान:बार्शी /पुणे,महाराष्ट्र

बार्शी/पुणे : “जीवन में सफलता पाने के लिए अनेक क्षेत्र उपलब्ध हैं। प्रत्येक व्यक्ति यदि अपनी क्षमता और गुणों को पहचानकर सही क्षेत्र का चयन करे, तो सफलता निश्चित रूप से प्राप्त की जा सकती है। जब कोई व्यक्ति ऊंचाइयों तक पहुंचता है, तब समाज उसका सम्मान करता है, लेकिन उसके पीछे छिपे कठिन परिश्रम को भी समझना जरूरी है। अत्यंत संघर्षपूर्ण परिस्थितियों से आगे बढ़ते हुए रमेश घोलप ने आईएएस अधिकारी बनकर अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका जीवन संघर्ष और व्यक्तित्व सभी के लिए प्रेरणादायक है,” ऐसा प्रतिपादन प्रसिद्ध निर्देशक नागराज मंजुळे ने किया।

आईएएस अधिकारी रमेश घोलप के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘इथे थांबणे नाही’ के संशोधित संस्करण का प्रकाशन किया गया। साथ ही उमेद प्रतिष्ठान द्वारा निर्मित ‘वाट रेखाटणारी पावलं’ (मराठी) तथा ‘ग्राऊंडेड ग्लोरी’ (अंग्रेज़ी) कॉफी टेबल पुस्तक का भी विमोचन नागराज मंजुळे और उद्योजक हणमंतराव गायकवाड के हाथों हुआ। यह कार्यक्रम बार्शी के शंकरराव निंबाळकर अध्यापक विद्यालय परिसर में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता डॉ. बी. वाय. यादव ने की।

इस अवसर पर विधायक दिलीप सोपल, कृषि उत्पन्न बाजार समिति के सभापति विजय गरड, माय मिरर पब्लिकेशन के मनोज अंबिके, वरिष्ठ नेता प्रा. तानाजी ठोंबरे, डिजिटल मीडिया संगठन के राज्याध्यक्ष राजा माने, रमेश घोलप की माता विमल घोलप और पत्नी रूपाली घोलप सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

हणमंतराव गायकवाड ने कहा कि करियर चुनते समय उद्योग क्षेत्र को भी सकारात्मक दृष्टि से देखना चाहिए और व्यक्तिगत सफलता के साथ समाज को कुछ लौटाने की भावना बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि रमेश घोलप ने झारखंड में संवेदनशीलता के साथ काम कर लोगों के दिलों में स्थान बनाया है।

रमेश घोलप ने अपने मनोगत में कहा कि जिस स्थान पर उन्होंने शिक्षा प्राप्त की, वहीं उनके जीवन पर आधारित पुस्तक का प्रकाशन होना उनके लिए गर्व और खुशी का क्षण है। उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों में सहयोग देने वाले शिक्षकों, मित्रों, परिवार और समाज का आभार व्यक्त किया।

विधायक दिलीप सोपल ने अपने भाषण में रमेश घोलप के स्वर्गीय पिता के साथ अपने संबंधों का भावनात्मक उल्लेख करते हुए कहा कि बार्शी का बेटा झारखंड में जाकर आम लोगों का अधिकारी बना, यह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

कार्यक्रम का संचालन कवि रामचंद्र इकारे ने किया। इस आयोजन की सफलता के लिए उमेद प्रतिष्ठान के अध्यक्ष उमेश घोलप सहित अनेक लोगों ने विशेष परिश्रम किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button