
संत गाडगेबाबा ने कीर्तन के माध्यम से किया समाज का प्रबोधन, बार्टी में समता सप्ताह का आयोजन
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:पुणे , महाराष्ट्र
संत गाडगेबाबा एक कर्मशील संत थे, जिन्होंने कीर्तन के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों, अंधविश्वास, जातिभेद और कर्मकांड पर प्रहार किया। उन्होंने स्वच्छता और शिक्षा के महत्व को भी जन-जन तक पहुंचाया। साथ ही अपने प्रवचनों में महात्मा ज्योतिराव फुले और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के कार्यों का गौरवपूर्ण उल्लेख कर उनके विचारों का प्रचार-प्रसार किया।
यह विचार प्रबोधनकार डॉ. सुनिल धनगर ने बार्टी संस्थान में आयोजित समता सप्ताह कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर 9 अप्रैल 2026 को बार्टी सभागार में “संत गाडगेबाबा का प्रबोधन” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर निबंधक डॉ. सुचिता शिंदे, विभाग प्रमुख शुभांगी पाटिल, डॉ. बबन जोगदंड, लेखाधिकारी नितीन चव्हाण सहित बार्टी संस्थान के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन से हुई। संचालन रामदास लोखंडे ने किया, जबकि प्रस्तावना प्रज्ञा मोहिते ने प्रस्तुत की। अंत में वैशाली खांडेकर ने आभार व्यक्त किया।



