
‘नारी शक्ति वंदन’ से महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में होगी बढ़ोतरी
‘नारी शक्ति वंदन’ अभियान से महिला सशक्तिकरण को मिलेगी नई दिशा
राज्यसभा सांसद प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी की जानकारी; 15-16 अप्रैल को देशभर में पदयात्रा व विभिन्न कार्यक्रम
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे: महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ की पृष्ठभूमि में भाजपा की ओर से देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान से महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिलेगी और राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिलेगा, ऐसी जानकारी राज्यसभा सांसद प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी ने पत्रकार परिषद में दी। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत 15 और 16 अप्रैल को प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में पदयात्रा, संवाद कार्यक्रम, महिला सम्मेलन आदि आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर नगरसेविका प्रो. डॉ. निवेदिता एकबोटे, प्रियांका शेंडगे-शिंदे और मनीषा लडकत उपस्थित थीं।
प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी ने कहा, “सितंबर 2023 में संसद में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला एक ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन कानून है। इस कानून में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सीटों में भी महिलाओं के लिए आरक्षण शामिल किया गया है। इससे महिलाएं केवल मतदाता तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि नीति निर्माण में भी उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ेगी। वैश्विक स्तर पर हुए शोध के अनुसार, महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक भागीदारी बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलता है। भारत में पिछले दशक में महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की गई हैं। उज्ज्वला योजना से स्वच्छ ईंधन मिला, जल जीवन मिशन से घर-घर पानी पहुंचा, और स्वच्छ भारत अभियान से महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान में सुधार हुआ। मुद्रा और जनधन योजनाओं ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूती दी है और बड़ी संख्या में महिला उद्यमी सामने आ रही हैं।”
राजनीतिक भागीदारी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज महिलाओं की मतदान में भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। 2024 के चुनावों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 65.78 तक पहुंच गया, जो कई जगह पुरुषों से भी अधिक है। हालांकि, संसद और विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी कम है। 1952 में लोकसभा में केवल 22 महिलाएं थीं, जो अब बढ़कर 75 हो गई हैं, लेकिन यह अपेक्षित स्तर से कम है। वहीं पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 46 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व है और उन्होंने स्थानीय स्तर पर पानी, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में प्रभावी काम किया है। इससे साबित होता है कि अवसर मिलने पर महिलाएं सक्षम प्रशासन दे सकती हैं। इसलिए इस कानून के माध्यम से उच्च स्तर पर भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि महिलाएं केवल मतदाता ही नहीं, बल्कि छात्रा, पेशेवर, उद्यमी और प्रशासनिक क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही हैं। निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ने से शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा जैसे मुद्दों को अधिक प्राथमिकता मिलेगी, जिससे विकास अधिक समावेशी और जनकेंद्रित होगा। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘सुकन्या समृद्धि योजना’, और ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ जैसे कार्यक्रमों से महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा में सकारात्मक बदलाव आया है। साथ ही, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।
इस पृष्ठभूमि में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ केवल एक कानून नहीं, बल्कि विकसित भारत की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं का नेतृत्व बढ़ने से लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा और देश के विकास को नई गति मिलेगी, ऐसा विश्वास कुलकर्णी ने व्यक्त किया।



