स्वादुपिंड के उन्नत कैंसर में ‘आयुर्वेद रसायन’ थेरेपी कारगर: पुणे के शोध को अंतरराष्ट्रीय मान्यता
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे: पैंक्रियाटिक कैंसर यानी स्वादुपिंड का कैंसर चिकित्सा क्षेत्र में सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण बीमारियों में गिना जाता है। ऐसे उन्नत अवस्था के मरीजों के लिए पुणे स्थित रसायू कैंसर क्लिनिक द्वारा विकसित ‘आयुर्वेद रसायन थेरेपी’ (एआरटी) उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। इस शोध को अमेरिका के सैन डिएगो में आयोजित AACR 2026 सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया, जहां वैश्विक विशेषज्ञों ने इसकी प्रभावशीलता को सराहा।
क्लिनिक के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. योगेश बेंडाळे ने बताया कि उन्नत पैंक्रियाटिक कैंसर का पता अक्सर अंतिम चरण में चलता है, जब सर्जरी, कीमोथेरेपी या अन्य उपचार विकल्प सीमित रह जाते हैं। आमतौर पर ऐसे मरीजों की जीवन अवधि 3 से 6 महीने मानी जाती है, लेकिन इस आयुर्वेदिक रसायन थेरेपी से उपचारित मरीजों में औसतन 10 से 11 महीने तक जीवन बढ़ने के संकेत मिले हैं।
यह अध्ययन 17 मरीजों पर किया गया और इसके परिणाम 16.6 इम्पैक्ट फैक्टर वाले प्रतिष्ठित जर्नल Cancer Research में प्रकाशित हुए हैं। इस शोध में डॉ. पूनम बिरारी-गवांदे, डॉ. प्रियंका शिरोळे और डॉ. अविनाश कदम का भी योगदान रहा।
डॉ. बेंडाळे के अनुसार, “यह थेरेपी केवल जीवन अवधि बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों की जीवन गुणवत्ता में भी सुधार लाती है। मरीजों की भूख बढ़ी, कमजोरी कम हुई और दैनिक जीवन में सक्रियता आई।”
उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया भर में इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी की दिशा में काम हो रहा है, जिसमें आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक पद्धतियों का समन्वय किया जाता है। भारत में भी इस दिशा में अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।
शोध के मुख्य निष्कर्ष:
सैन डिएगो में आयोजित AACR 2026 में 30,000 से अधिक विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुति
ऐसे मरीजों के लिए उपयोगी, जो सर्जरी या कीमोथेरेपी के योग्य नहीं
केवल आयुर्वेदिक रसायन थेरेपी से जीवन अवधि में वृद्धि
लगभग 12% मरीजों में ट्यूमर का आकार घटने के संकेत
भूख, कमजोरी और अन्य लक्षणों में सुधार
जीवनशैली और दैनिक कार्यों में उल्लेखनीय बदलाव
इस शोध से आयुर्वेद आधारित कैंसर उपचार को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना जताई जा रही है।

