
सुदृढ़ मांसपेशियों और सुडौल शरीर के लिए ‘वंडर एक्सॉन’ तकनीक प्रभावी
डॉ. पल्लवी अहिरे-शेळके की जानकारी; बाणेर स्थित ‘स्किनएथिक्स’ में भारत की पहली उन्नत तकनीक उपलब्ध
रिपोर्ट ;विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे: बदलती जीवनशैली, जिम के लिए सीमित समय और तेजी से परिणाम पाने की बढ़ती अपेक्षा के चलते फिटनेस क्षेत्र में ‘मसल टोनिंग’ एक नया वैज्ञानिक ट्रेंड बनकर उभर रहा है। केवल वजन कम करना ही शरीर को स्वस्थ बनाना नहीं है; वास्तव में शरीर को मजबूत और संतुलित बनाने के लिए पूरे शरीर की मांसपेशियों का विकसित होना जरूरी है। बिना किसी सर्जरी के वजन कम करने के साथ मजबूत मांसपेशियां और सुडौल शरीर पाने के लिए ‘वंडर एक्सॉन’ तकनीक प्रभावी साबित हो रही है। यह वैश्विक तकनीक अब भारत में पहली बार बाणेर स्थित SkinEthics Hospital में उपलब्ध कराई गई है। यह जानकारी प्रसिद्ध त्वचा रोग विशेषज्ञ Dr. Pallavi Ahire-Shelke ने पत्रकार वार्ता में दी।
इस अवसर पर अस्पताल की अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर—डॉ. कांचन मुले, डॉ. प्राजक्ता शर्मा, डॉ. प्रियांका बोबडे तथा बाणेर-बालेवाड़ी मेडिकल एसोसिएशन के संस्थापक डॉ. राजेश देशपांडे भी उपस्थित थे।
18 वर्षों से अधिक के अनुभव वाली डॉ. पल्लवी अहिरे-शेळके ने बताया कि पिछले 12 वर्षों से स्किनएथिक्स हॉस्पिटल पुणे में त्वचा, बाल और सौंदर्य उपचार के क्षेत्र में आधुनिक और सुरक्षित सेवाएं प्रदान कर रहा है। यहां विशेषज्ञों की निगरानी में अत्याधुनिक तकनीक के जरिए उपचार किए जाते हैं। अब त्वचा और बालों के साथ-साथ बॉडी शेपिंग से जुड़े उन्नत उपचार भी उपलब्ध हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अस्पताल की कार्यप्रणाली केवल बाहरी समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके मूल कारणों को समझकर दीर्घकालिक और टिकाऊ परिणाम देने पर आधारित है। प्रत्येक मरीज को व्यक्तिगत उपचार योजना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इलाज दिया जाता है।
‘वंडर एक्सॉन’ एक नॉन-सर्जिकल बॉडी कंटूरिंग तकनीक है, जिसमें हाई-पावर न्यूरोमस्क्युलर स्टिम्युलेशन और रेडियोफ्रीक्वेंसी का संयोजन उपयोग किया जाता है। यह तकनीक मांसपेशियों को मजबूत बनाती है, त्वचा को टाइट करती है और शरीर को टोन करने में मदद करती है। साथ ही यह फैट कम करने में भी सहायक है।
यह उपचार विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयोगी है जो किसी शारीरिक समस्या के कारण व्यायाम नहीं कर सकते, या जिन्हें यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस, डायस्टेसिस जैसी समस्याएं हैं, तथा जो जीएलपी इंजेक्शन लेते समय मांसपेशियों की कमी का सामना कर रहे हैं।


