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पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी जरूरी

विश्व पर्यावरण दिवस पर वन विभाग द्वारा जागरूकता कार्यशाला की गई आयोजित

पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी जरूरी

विश्व पर्यावरण दिवस पर वन विभाग द्वारा जागरूकता कार्यशाला की गई आयोजित

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान: रीवा मध्य प्रदेश 

रीवा . विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा जयंती कुंज में पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन विषय पर एक विशेष संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं, अधिकारियों एवं सामाजिक संगठनों समग्र जन चेतना विकास परिषद एवं अहिंसा वेलफेयर सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने सहभागिता कर पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री समीर मिश्रा उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वन संरक्षक अनुराग कुमार ने की। विशिष्ट अतिथियों में वनमंडल अधिकारी लोकेश निरापुरे, एसडीओ हितेश खंडेलवाल तथा कैलाश जोशी (सामाजिक वानिकी) शामिल रहे। कार्यक्रम का संयोजन एसडीओ हृदय लाल सिंह ने किया, जबकि संचालन निलेश श्रीवास्तव द्वारा किया गया।

मुख्य अतिथि समीर मिश्रा ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों, वन भूमि को अतिक्रमण से बचाने, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन तथा अवैध उत्खनन पर रोक लगाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास की दौड़ में पर्यावरण संरक्षण की अनदेखी नहीं की जा सकती और विकास का मॉडल प्रकृति के अनुकूल होना चाहिए। वनमंडल अधिकारी लोकेश निरापुरे ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व स्तर पर हो रहे युद्धों और बढ़ती मानवीय गतिविधियों का पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि एक अनुमान के अनुसार युद्धों के कारण लगभग 33 हजार टन कार्बन उत्सर्जन हुआ है, जिसके प्रभाव को कम करने के लिए बड़े स्तर पर वृक्षारोपण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है और वन विभाग इस दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने जिले में गिद्ध संरक्षण के लिए फीडिंग स्टेशन विकसित किए जाने की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि वन विभाग के सहयोग से समग्र जन चेतना विकास परिषद एवं वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा किए जा रहे संरक्षण प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में इन प्रयासों को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। वन संरक्षक अनुराग कुमार ने अपने उद्बोधन में प्रकृति के एकतरफा दोहन की मानसिकता को त्यागने और पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर, आंगन और आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए स्वयं पहल करनी चाहिए। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता सुमित सिंह, आरती पटेल, राजरख पटेल, गायत्री सेवा संस्थान के प्रतिनिधियों सहित वन विभाग के समस्त रेंजर, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। अंत में सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन के लिए सामूहिक संकल्प लिया।

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