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आईआईटी में गर्ल पॉवर: 10 साल में दोगुनी से ज्यादा हुई काउंसलिंग के लिए क्वालीफाई छात्राओं की संख्या

सुपर न्यूमेरेरी स्कीम के तहत फीमेल पूल कोटे के चलते मिल रहा छात्राओं को मौका

आईआईटी में गर्ल पॉवर: 10 साल में दोगुनी से ज्यादा हुई काउंसलिंग के लिए क्वालीफाई छात्राओं की संख्या

सुपर न्यूमेरेरी स्कीम के तहत फीमेल पूल कोटे के चलते मिल रहा छात्राओं को मौका

 

समय के साथ कोर्सेज बदले, एआई, मशीन लर्निंग, कम्प्यूटर साइंस जैसे विषयों के चलते बढ़ा छात्राओं का रूझान

 

इस वर्ष अब तक की सर्वाधिक 10107 छात्राएं क्वालीफाई

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:कोटा ,राजस्थान

कोटा. इंजीनियरिंग एजुकेशन में अब छात्राएं भी बराबर चुनौती दे रही हैं। देश की आईआईटीज में छात्राओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। जेईई एडवांस्ड 2026 के रिजल्ट्स में काउंसलिंग के लिए क्वालीफाइ गल्र्स की संख्या में पिछले वर्षों में सर्वाधिक है। इस वर्ष 10 हजार 107 छात्राएं क्वालीफाई हुई हैं जो कि कुल क्वालीफाइड विद्यार्थियों का 17.76 प्रतिशत है। इससे पहले कभी 10 हजार की संख्या तक छात्राएं क्वालीफाइ नहीं हुई। इन क्वालीफाइड छात्राओं की संख्या में बड़ा योगदान एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट का भी है, एलन से इस वर्ष 1044 छात्राएं काउंसलिंग के लिए क्वालीफाइ हुई है। यही नहीं एलन कोटा में पढ़ी छात्रा आरोही देशपांडे आल इंडिया रैंक-77 के साथ गर्ल टाॅपर रही। पिछले 10 वर्ष में काउंसलिंग के लिए क्वालीफाई होने वाली छात्राओं की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। 2016 में जेईई क्वालीफाई होने वाली छात्राओं की संख्या 4570 थी जो 2026 में 10107 हो गई है।

एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के सीईओ नितिन कुकरेजा ने कहा कि देश में इंजीनियरिंग एजुकेशन के प्रति छात्राओं का रूझान बढ़ना अच्छे और समृद्ध भविष्य के संकेत हैं। टेक्नीकल फील्ड में छात्राओं के आने से सामाजिक बदलाव आ रहा है। एलन भी छात्राओं में इंजीनियरिंग एजुकेशन के प्रति जागरूकता के लिए पूरी तरह से सक्रिय है। छात्राओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यही कारण है कि इस वर्ष के परिणामों में इंस्टीट्यूट से 1044 छात्राओं ने क्वालीफाई किया और उम्मीद है इनमें से बड़ी संख्या में छात्राएं आईआईटीज में अध्ययन करेंगी।

जेईई- एडवांस्ड 2026 में आल इंडिया गर्ल टाॅपर रही आरोही देशपांडे का कहना है कि सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करनी चाहिए। मेरे सपने पूरे करने में परिवार ने पूरा सपोर्ट किया, 4 साल तक मेरे साथ कोटा में रहे। एलन फैकल्टीज ने मुझे अच्छी तरह से गाइड किया और यही कारण रहा कि रिजल्ट अपेक्षा से अच्छे आए और मैं गर्ल टाॅपर रही। इनमें शामिल छात्राएं मेट्रो और बड़े शहरों के साथ देश के छोटे कस्बे व हर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

देश में इंजीनियरिंग एजुकेशन में छात्राओं का रूझान बढ़ने के तीन मुख्य कारण हैं।

पहला: सुपर न्यूमेरेरी कोटा

इंजीनियरिंग शिक्षा के प्रति रूझान बढ़ाने और छात्राओं के उत्साहवर्धन है कि भारत सरकार ने आईआईटीज में प्रवेश पर वर्ष 2018 में सुपर न्यूमेरेरी कोटा घोषित किया। इसके तहत फीमेल-पूल कोटे से 14 प्रतिशत अतिरिक्त सीटों पर छात्राओं को प्रवेश देना शुरू किया गया। 2019 में यह प्रतिशत 17 किया गया और फिर वर्ष 2020 में इसे 20 प्रतिशत कर दिया गया। वर्तमान में इस कोटे के तहत 20 प्रतिशत अतिरिक्त सीटों पर छात्राओं को प्रवेश दिया जा रहा है।

छूसरा: तकनीकी बदलाव

देश में तकनीक की क्रांति आने के बाद इनफोर्मेशन टेक्नोलाॅजी, कम्प्यूटर साइंस और अब आर्टिफिशल इंटेलीजेंस (एआई) की डिमांड बढ़ी। इससे पूर्व इंजीनियरिंग शिक्षा को फील्ड वर्क से जोड़ा जाता था, जिसके कोर विषय सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रीकल, इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड कम्यूनिकेशन हुआ करते थे। नए कोर्सेज की डिमाण्ड और कम्प्यूटर बेस्ड काम बढ़ने से छात्राओं के लिए इस क्षेत्र में वर्किंग ज्यादा सुविधाजनक हुई। इन कोर्सेज में अच्छे पैकेज आॅफर होने लगे, इसे देखते हुए छात्राओं का रूझान बढ़ने लगा।

तीसरा: गांव-गांव तक जागरूकता

आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों के नाम किसी समय सिर्फ मेट्रो शहरों तक सुना जाता था। इसके बाद आईआईटी-जेईई प्रवेश परीक्षाओं को लेकर कोचिंग होने लगी। कोटा व देश के अन्य शहरों से छोटे-गांव कस्बे के विद्यार्थियों का चयन आईआईटी के लिए होने लगा। विदेशों से बड़े सैलेरी पैकेज मिलने लगे। जब यह संदेश समाज तक पहुंचे तो गांव-गांव से विद्यार्थी इन परीक्षाओं को लेकर जागरूक हुए। छात्रों के साथ छात्राएं भी गांवों से निकलकर आईआईटी तक पहुंचने लगी। इससे छात्राओं की सहभागिता परीक्षा में बढ़ी।

कोटा में 50 हजार से अधिक छात्राएं

देश में इंजीनियरिंग व मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए विख्यात कोटा में देशभर से स्टूडेंट्स आते हैं। इनमें 40 हजार से अधिक छात्राएं वर्तमान मंे अध्ययन कर रही हैं। नेशनल लेवल का कम्पीटिशन, सुरक्षित वातावरण और श्रेष्ठ शिक्षण के चलते कोटा में तैयारी कर रहे विद्यार्थियों का सफलता प्रतिशत अन्य शहरों और राज्यों की अपेक्षा अच्छा रहता है। इंजीनियरिंग में भी

 

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