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प्राकृतिक खेती कार्यक्रम के अंतर्गत विकास खंड बसरेहर स्थित परौली रमायन गौशाला में चयनित कृषकों को घनजीवामृत वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

प्राकृतिक खेती कार्यक्रम के अंतर्गत विकास खंड बसरेहर स्थित परौली रमायन गौशाला में चयनित कृषकों को घनजीवामृत वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: इटावा उत्तर प्रदेश 

इटावा – जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में प्राकृतिक खेती कार्यक्रम के अंतर्गत विकास खंड बसरेहर स्थित परौली रमायन गौशाला में चयनित कृषकों को घनजीवामृत वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अपनी कृषि भूमि के कुछ भाग पर प्राकृतिक खेती प्रारंभ करें तथा धीरे-धीरे इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए इसका विस्तार करें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ती है, उत्पादन लागत घटती है तथा पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य की भी रक्षा होती है।

 

 

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर धर्मेंद्र सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि गौ-आधारित प्राकृतिक खेती को अपनाकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से घनजीवामृत सहित प्राकृतिक खेती के विभिन्न जैविक उत्पादों का अधिकाधिक उपयोग करने का आग्रह किया।

प्राकृतिक खेती के मास्टर ट्रेनर अरविंद प्रताप सिंह परिहार ने किसानों को गौ-आधारित प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, ब्रह्मास्त्र, अग्निअस्त्र एवं नीमास्त्र सहित प्राकृतिक खेती में प्रयुक्त प्रमुख जैविक घोलों के निर्माण, उपयोग एवं लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।

 

कार्यक्रम के अंत में चयनित किसानों को घनजीवामृत का वितरण किया गया तथा सभी उपस्थित कृषकों ने प्राकृतिक खेती को अपनाने एवं अन्य किसानों को भी इसके प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के समापन के बाद जिलाधिकारी महोदय जी एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी जी द्वारा वृक्षारोपण कार्यक्रम भी किया गया

उक्त कार्यक्रम में पशु चिकित्साधिकारी डॉ0 दिलीप कुमार सिंह, डॉ0 हर्षवर्धन, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सुबेंद्र जी, ग्राम विकास अधिकारी प्रदीप कुमार सहित क्षेत्र के प्रगतिशील प्राकृतिक खेती करने वाले कृषक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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