
लोक कलाकारों की उपेक्षा दूर करने के लिए सरकार आगे आए : पद्मश्री रघुवीर खेडेकर
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे, समाज में समरसता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने में लोक कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन आज भी वे उपेक्षा और आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार को गंभीर पहल करनी चाहिए। यह मांग पहले समरसता लोककला सम्मेलन के अध्यक्ष पद्मश्री रघुवीर खेडेकर ने की।
महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग, सांस्कृतिक संचालनालय तथा समरसता साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पहले समरसता लोककला सम्मेलन में उन्होंने कहा कि लोक कलाकार सदियों से अपनी कला के माध्यम से सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सौहार्द का संदेश देते आए हैं, लेकिन उनका स्वयं का जीवन आज भी संघर्षपूर्ण बना हुआ है।
सम्मेलन में वरिष्ठ अभिनेत्री एवं लावणी नृत्यांगना मधु कांबिकर को जीवन गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। अस्वस्थता के कारण उनकी अनुपस्थिति में उनकी बहन रत्ना कांबिकर ने पुरस्कार ग्रहण किया।
कार्यक्रम में मराठी भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अविनाश आलेगांवकर, लोक कलाकार नंदेश उमप, मंगला बनसोडे, लीला गांधी, जयमाला इनामदार, सुरेखा पुणेकर, सचिन कुमावत, वैशाली जाधव, रेशमा मुसळे, अनिल मोरे, जान्हवी जानकर, विश्वनाथ गराडकर, धीरज घाटे, धनंजय खुडे, निलेश गद्रे तथा डॉ. प्रसन्न पाटील सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
रघुवीर खेडेकर ने कहा कि लोक कलाकार सरकार की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए सदैव तैयार हैं, लेकिन आज भी उन्हें समाज में उचित सम्मान नहीं मिलता। गांव-गांव जाकर कला प्रस्तुत करने वाले कलाकारों को कई बार स्थानीय प्रभावशाली लोगों के अन्याय का सामना करना पड़ता है और उनकी शिकायतों पर प्रशासन भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं करता।
समरसता साहित्य परिषद के कार्यवाह डॉ. प्रसन्न पाटील ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक आयोजन करना नहीं, बल्कि लोक कलाकारों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना और समाज निर्माण में उनकी भूमिका को और मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि लोक कलाकारों के हितों की रक्षा और लोककलाओं के संरक्षण के लिए एक सशक्त संगठन तैयार किया जा रहा है।
कार्यक्रम में बिग बॉस फेम अहिराणी लोक कलाकार सचिन कुमावत, स्वागताध्यक्ष धीरज घाटे, जयमाला इनामदार, मंगला बनसोडे तथा धनंजय खुडे ने भी अपने विचार रखे।
सम्मेलन की शुरुआत स्वरानुभव भजनी मंडल द्वारा गणेश वंदना से हुई। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति ने समारोह में उत्साह का वातावरण बनाया। उद्घाटन से पहले महापालिका भवन से बालगंधर्व रंगमंदिर तक कलाकारों की भव्य शोभायात्रा निकाली गई तथा लोककला वाद्यों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।
बॉक्स : मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर जताई नाराजगी, पद्मश्री लौटाने की चेतावनी
सम्मेलन का उद्घाटन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों होना था तथा सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार सहित अन्य मंत्री भी कार्यक्रम में आने वाले थे, लेकिन व्यस्तता के कारण वे उपस्थित नहीं हो सके। इस पर नाराजगी जताते हुए पद्मश्री रघुवीर खेडेकर ने कहा कि यदि एक माह के भीतर मुख्यमंत्री और सांस्कृतिक कार्य मंत्री की उपस्थिति में लोक कलाकारों की समस्याओं पर ऐसा सम्मेलन आयोजित नहीं किया गया, तो वे अपना पद्मश्री सम्मान लौटाने पर विचार करेंगे।



