पूणेमहाराष्ट्रस्वास्थ्य

पीबीएमए के एच.व्ही.देसाई आय हॉस्पिटल में स्प्लिट कॉर्निया प्रत्यारोपण से दो मरीजों को मिली नई रोशनी

पीबीएमए के एच.व्ही.देसाई आय हॉस्पिटल में स्प्लिट कॉर्निया प्रत्यारोपण से दो मरीजों को मिली नई रोशनी

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:पुणे महाराष्ट्र 

पुणे,: पीबीएमए के एच.व्ही.देसाई आय हॉस्पिटल के कॉर्निया विभाग ने शस्त्रक्रिया में अचूकता व उपलब्ध संसाधनों के इष्टतम इस्तेमाल करते हुए एक ही दाता के कॉर्निया का उपयोग कर स्प्लिट कॉर्निया प्रत्यारोपण द्वारा दो मरीजों को उनकी दृष्टी वापस दिलाने में सफलता प्राप्त की है.यह शस्त्रक्रिया १९ जून २०२६ को की गई.

 

कॉर्निया मतलब आंख के बाहरी आवरण की पारदर्शक ऊतक होती है, जिसके दाताओं की अत्यंत कमी है.ऐसी स्थिती में नेत्र विशेषज्ञों की एक विशेष टीम ने सफलतापूर्वक कॉम्पोनंट कॉर्नियल शस्त्रक्रिया की. इस तकनीक में दाता के ऊतक का विभाजन विशिष्ट शारीरिक संरचना के नुसार (ॲनाटॉमीकल लेअर्स) विभाजित किया जाता है. जिससे एक अमूल्य नेत्रदान का अधिकतम उपयोग संभव हो पाता है.

 

पीबीएमए के एच.व्ही.देसाई आय हॉस्पिटल के कॉर्निया विभाग की प्रमुख व नेत्रपेढी की संचालिका डॉ.शिल्पा जोशी ने कहा की,पारंपारिक पध्दती में केरॅटोप्लास्टी प्रक्रिया में पूरा कॉर्निया प्रत्यारोपित किया जाता है.अर्थात एक दाता का एक कॉर्निया केवल एक ही मरीज को उपयुक्त होता है. लेकिन आधुनिक वैद्यक शास्त्र की वजह से शल्यचिकित्सक, मरीज के स्वस्थ ऊतक को सुरक्षित रखते हुए केवल खराब भाग या लेयर को ही बदल सकते हैं.

 

उन्होंने आगे बताया कि, इस प्रक्रिया के लिए कॉर्निया से संबंधित पूरी तरह अलग-अलग रोगों से पीड़ित दो प्रतीक्षारत मरीजों का चयन किया गया था. इससे एक ही दाता के कॉर्निया को प्रत्यारोपण के लिए दो कार्यक्षम भागों में विभाजित करना संभव हो सका.

 

इनमें पहला प्राप्तकर्ता जामखेड़ के 76 वर्षीय किसान हैं, जो पिछले 10 से 15 वर्षों से लेफ्ट आई हर्पीस सिम्प्लेक्स केराटाइटिस (वायरल संक्रमण) के कारण आंख की रोशनी कम होने की समस्या से जूझ रहा था. दूसरी प्राप्तकर्ता 67 वर्षीय महिला मरीज हैं, जिनकी दाहिनी आंख में मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद कॉर्निया में सूजन आ गई थी, जिससे वह अपारदर्शी हो गया था.

 

यह सब दाता के परिवार द्वारा नेत्रदान की सहमति देने से संभव हो पाया. 17 जून 2026 को 60 वर्षीय व्यक्ति के निधन के बाद उनके परिवार ने नेत्रदान का निर्णय लिया. इसके बाद यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल हॉस्पिटल (वाईसीएम) द्वारा नेत्रदान की पूरी समन्वय एवं प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई.

 

पीबीएमए के एच. वी. देसाई आई हॉस्पिटल की अनुभवी काउंसलर मनीषा पांढरे ने समय के महत्व को समझते हुए वी फॉर ऑर्गन संस्था के प्रतिनिधि श्री आपटे के साथ मिलकर दाता के परिवार से संवाद स्थापित किया और कॉर्निया प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी की. इसके बाद कॉर्निया को सुरक्षित रूप से एच. वी. देसाई आई हॉस्पिटल के आय बैंक तक पहुंचाया गया.

 

पूरी टीम की सराहना करते हुए पीबीएमए के एच. वी. देसाई आई हॉस्पिटल के मुख्य वैद्यकीय संचालक (नेटवर्क) डॉ. राहुल देशपांडे ने कहा कि भारत में कॉर्निया की गंभीर कमी है और हजारों मरीज प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं. ऐसे में प्रत्येक कॉर्निया का अधिकतम उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है. डॉ. शिल्पा जोशी के नेतृत्व में टीम ने कॉम्पोनेंट कॉर्नियल सर्जरी के माध्यम से इसका महत्त्व प्रस्तुत किया है.

 

डॉ.शिल्पा जोशी ने कहा की, ऐसी कॉम्पोनेंट सर्जरी में मरीज के कॉर्निया का मूल भाग सुरक्षित रहने के कारण प्रत्यारोपित अवयव को शरीर द्वारा अस्वीकार किए जाने का खतरा काफी कम हो जाता है.साथ ही, सर्जरी के बाद दृष्टि में सुधार भी पारंपरिक कॉर्निया प्रत्यारोपण की तुलना में अधिक बेहतर होता है.

 

दोनों मरीजों की स्थिति अब अच्छी है और आने वाले कुछ सप्ताहों में उनकी दृष्टि में और अधिक सुधार होने की उम्मीद है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button