
सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में ‘तृतीयपंथी पहचान और समस्याएं: जन-जागरूकता’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल समापन
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे, । सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एजुकेशन, शिक्षा एवं विस्तार विभाग, जेंडर स्टडीज विभाग तथा महाराष्ट्र शासन के सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 11 एवं 12 जुलाई 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
‘तृतीयपंथी पहचान और समस्याएं: जन-जागरूकता’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में तृतीयपंथी समुदाय की पहचान, शैक्षणिक समावेशिता, सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं, कानूनी अधिकारों, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तथा समतामूलक एवं समावेशी समाज के निर्माण के लिए आवश्यक नीतिगत उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने तृतीयपंथी समुदाय के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने, सम्मान, समान अवसर तथा संस्थागत सहयोग को समय की आवश्यकता बताया।
समापन समारोह में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। महाराष्ट्र सरकार की सामाजिक न्याय राज्यमंत्री माधुरी मिसाळ विशिष्ट अतिथि रहीं। वहीं, अलायंस इंडिया के ‘प्रोजेक्ट साहस’ की एडवोकेसी एवं प्रशिक्षण अधिकारी सिमरन अरोरा ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया। सभी वक्ताओं ने तृतीयपंथी समुदाय के लिए समावेशी शिक्षा, सामाजिक स्वीकार्यता और कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया।
विश्वविद्यालय के प्र-कुलगुरु डॉ. पराग काळकर ने अतिथियों का स्वागत किया। नेशनल काउंसिल फॉर ट्रांसजेंडर पर्सन्स (NCTP) की विशेषज्ञ सदस्य एवं विश्वविद्यालय की सीनेट सदस्य डॉ. अपर्णा लालिंगकर ने संगोष्ठी का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। शिक्षा एवं विस्तार विभाग की प्रमुख तथा संगोष्ठी की समन्वयक प्रो. (डॉ.) गीता शिंदे ने अतिथियों का परिचय कराया, जबकि स्कूल ऑफ एजुकेशन के निदेशक प्रो. (डॉ.) विलास आढाव ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर प्रबंधन परिषद सदस्य रविंद्र सिंगणापुरकर, बागेश्री मंठाळकर, अधिसभा सदस्य प्रसेनजीत फडणवीस, कृष्णा भंडलकर, शंतनु लामदाडे, बस्ते सर, प्रो. डॉ. विजय खरे, पुणे महानगरपालिका के उपमहापौर परशुराम वाडेकर, संजय सोनवणे, शैलेंद्र चव्हाण सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


