
Rajgarh Eco Car Accident: एक साथ उठीं 9 अर्थियां, चार मासूम भी शामिल; अंतिम विदाई देख रो पड़ा पूरा गांव
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:देवास मध्य प्रदेश
देवास। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के सारंगपुर में हुए दर्दनाक ईको कार हादसे ने एक पूरे परिवार को उजाड़ दिया। हादसे में जान गंवाने वाले एक ही परिवार के 9 सदस्यों का मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया। देवास जिले के ग्राम धांसड़ में जब एक साथ कई अर्थियां उठीं तो हर आंख नम हो गई। अंतिम विदाई के दौरान गांव में मातम पसरा रहा। मृतकों में चार मासूम बच्चे भी शामिल हैं।
बताया गया कि मृतकों में शंकर, सागर बाई, विशाल, उसकी पत्नी पूजा, विशाल की बेटी वंशिका और महक का अंतिम संस्कार ग्राम धांसड़ में किया गया। वहीं शंकर की बेटी रीनू बाई, उसके बेटे राजवीर और बेटी जसप्रीत का अंतिम संस्कार खंडवा जिले के पुनासा में किया गया। एक ही परिवार के नौ लोगों की मौत से गांव में हर कोई स्तब्ध है।
सोमवार देर रात सतवास पहुंचाए गए शव
हादसे के बाद मृतकों के शव सोमवार देर रात सतवास लाए गए। रात करीब 10:45 बजे शवों को शासकीय अस्पताल की मर्चुरी में रखा गया। शव पहुंचने में देरी को देखते हुए अस्पताल प्रशासन की ओर से रात में आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं।
सतवास तहसीलदार संजय गर्ग ने बताया कि शव देर रात अस्पताल पहुंचे थे, जिसके चलते उन्हें रात के लिए मर्चुरी में रखा गया। इसके बाद मंगलवार को परिजनों को शव सौंपे गए और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
मां का इलाज कराने निकला था पूरा परिवार
बताया जा रहा है कि धांसड़ गांव की रहने वाली सागर बाई कुछ समय पहले हुए हादसे के बाद लकवाग्रस्त हो गई थीं। उनकी हालत गंभीर थी और वह कोमा में चली गई थीं। परिवार को उम्मीद थी कि सारंगपुर क्षेत्र स्थित देव स्थान पर जाने से उनकी हालत में सुधार हो सकता है।
इसी उम्मीद में परिवार के कई सदस्य ईको कार में सवार होकर सागर बाई को लेकर जा रहे थे। लेकिन रास्ते में तेज बारिश और पुल पर भरे पानी ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी।
गांव के पूर्व सरपंच ओमप्रकाश पटेल के अनुसार, परिवार बेहद सामान्य आर्थिक स्थिति वाला था और मजदूरी कर अपना जीवन चलाता था। सागर बाई के इलाज में परिवार पहले ही काफी पैसा खर्च कर चुका था।
इलाज के लिए जमीन तक रख दी थी गिरवी
ग्रामीणों के मुताबिक परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। सागर बाई के इलाज के लिए परिवार ने अपनी जमीन तक गिरवी रख दी थी। इसके बावजूद परिजन उनका इलाज कराने और उन्हें ठीक करने की कोशिश में जुटे हुए थे।
इस हादसे के बाद परिवार का एकमात्र बेटा कुशाल बचा है, जो इंदौर में रहता है। बताया गया कि उसे काफी देर बाद हादसे की जानकारी मिली। एक साथ परिवार के इतने सदस्यों को खोने के बाद गांव में हर कोई कुशाल और परिवार के दुख को देखकर भावुक नजर आया।
बाहर का चालक था, स्थानीय रास्ते की जानकारी नहीं थी
बताया जा रहा है कि परिवार सतवास से सारंगपुर क्षेत्र की ओर जा रहा था। वाहन चालक स्थानीय रास्ते से पूरी तरह परिचित नहीं था। इसी दौरान तेज बारिश के कारण पुल पर पानी भर गया था।
पानी का बहाव अधिक होने और सड़क की स्थिति स्पष्ट नहीं दिखाई देने के कारण चालक को पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लगा। जैसे ही कार पुल पर आगे बढ़ी, वह पानी में फंस गई और तेज बहाव के कारण असंतुलित होकर बहने लगी।
कुछ ही देर में ईको कार पानी में समा गई और उसमें सवार लोग लापता हो गए।
ग्रामीणों ने रोकने की कोशिश की, लेकिन आगे बढ़ गई कार
ग्रामीणों के अनुसार पुल पर पहले से ही काफी पानी भरा हुआ था। स्थानीय लोगों ने कार चालक को आगे जाने से रोकने की कोशिश भी की थी। ग्रामीणों ने उसे पानी के बीच से वाहन नहीं ले जाने की सलाह दी, लेकिन चालक ने वाहन को आगे बढ़ा दिया।
इसके बाद कार पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गई। हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। रेस्क्यू टीमों ने भी मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया। काफी प्रयासों के बाद दो लोगों को बचाया जा सका, जबकि परिवार के नौ लोगों की जान चली गई।
24 घंटे में हुई करीब 8 इंच बारिश से बिगड़े हालात
बताया गया कि क्षेत्र में 24 घंटे के दौरान करीब 8 इंच बारिश हुई थी। भारी बारिश के कारण नदी-नालों और पुलों पर पानी का स्तर बढ़ गया था। इसी वजह से सड़क तक पानी पहुंच गया और पुल पर स्थिति बेहद खतरनाक हो गई।
हादसे के बाद प्रशासन और रेस्क्यू टीमों ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य किया। घटना ने एक बार फिर बारिश के दौरान जलभराव वाले पुलों और रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने 4-4 लाख रुपये सहायता की घोषणा की
हादसे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रत्येक मृतक के परिवार को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
राजगढ़ जिले के अधिकारियों के अनुसार मृतकों के परिजनों को आरबीसी-6 (4) के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं कन्नौद एसडीएम प्रिया चंद्रावत के अनुसार जनपद पंचायत की ओर से अंतिम संस्कार के लिए प्रत्येक परिवार को 5-5 हजार रुपये की सहायता राशि भी दी गई।
एक साथ उठीं अर्थियां तो हर आंख हुई नम
मंगलवार को जब धांसड़ गांव में एक साथ कई अर्थियां उठीं तो पूरा गांव शोक में डूब गया। किसी ने नहीं सोचा था कि इलाज के लिए घर से निकला परिवार इतनी बड़ी त्रासदी का शिकार हो जाएगा।
चार मासूम बच्चों समेत परिवार के नौ लोगों की मौत ने गांव के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। अंतिम विदाई के दौरान परिजनों की चीख-पुकार और ग्रामीणों की नम आंखों ने माहौल को बेहद गमगीन कर दिया। जिस परिवार के सदस्य एक साथ इलाज की उम्मीद लेकर निकले थे, उनमें से अधिकांश की एक साथ अर्थियां वापस लौटीं।


