
इटावा में 50 करोड़ की विकास निधि का हिसाब कौन देगा?
पांच साल में सांसद-विधायक निधि से हुए कामों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग, कागज से निकलकर जमीन पर जांच की जरूरत
रिपोर्ट :विशाल समाचार विशेष
स्थान: इटावा उत्तर प्रदेश
इटावा। जिले में पिछले पांच वर्षों के दौरान सांसद और विधायक निधि से विकास कार्यों पर खर्च हुई करीब 50 करोड़ रुपये की राशि अब सवालों के घेरे में है। करीब 25 करोड़ रुपये सांसद निधि और लगभग 25 करोड़ रुपये विधायक निधि से खर्च किए जाने की बात सामने आ रही है। सवाल सीधा है—इतनी बड़ी रकम आखिर गई कहां और उसका विकास जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है?
जनता अब सिर्फ सरकारी फाइलों में दर्ज आंकड़ों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। जरूरत है कि पिछले पांच वर्षों में सांसद और विधायक निधि से स्वीकृत हर एक कार्य की सूची सार्वजनिक की जाए। किस गांव या वार्ड में सड़क बनी, कहां नाली बनी, कितने खड़ंजे बिछे, कितने सामुदायिक भवन तैयार हुए, कितनी स्ट्रीट लाइटें लगीं और पेयजल के नाम पर कितना काम हुआ—इन सबका पूरा हिसाब सामने आना चाहिए।
कागज पर विकास या जमीन पर हकीकत?
सबसे बड़ा सवाल उन कार्यों को लेकर है जिनके लिए सरकारी रिकॉर्ड में भुगतान हो चुका है। प्रत्येक कार्य की स्वीकृत लागत, कार्यदायी संस्था, भुगतान की राशि और मौके की मौजूदा स्थिति का मिलान कराया जाए तो तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।
सिर्फ फाइलों की जांच काफी नहीं होगी। भौतिक सत्यापन जरूरी है। जिस काम के नाम पर सरकारी खजाने से पैसा निकला, वह काम वास्तव में कितना हुआ और उसकी गुणवत्ता कैसी है—इसका जवाब मौके पर जाकर ही मिलेगा।
कमीशन के आरोपों ने बढ़ाई पारदर्शिता की चिंता
विधायक निधि से विकास कार्यों की अनुशंसा को लेकर उत्तर प्रदेश में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट में कुछ मामलों में कथित कमीशन मांगने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में विकास कार्यों की अनुशंसा के बदले कमीशन मांगने और कथित अनुशंसा-पत्र जारी किए जाने का दावा किया गया है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है। लेकिन ऐसे आरोपों के बीच विधायक निधि से कराए गए कार्यों की स्वीकृति से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी जांच की जरूरत और बढ़ जाती है।
इटावा खास ही नहीं, आसपास के जिलों में भी उठ सकता है सवाल
सांसद और विधायक निधि का पैसा जनता के विकास के लिए होता है। ऐसे में इटावा के साथ-साथ औरैया, मैनपुरी और आसपास के जिलों में भी पिछले वर्षों में इन निधियों से कराए गए कार्यों का रिकॉर्ड सार्वजनिक कर जमीनी हकीकत सामने लाना उपयोगी होगा।
कितना पैसा आया?किस काम के लिए स्वीकृत हुआ?किस संस्था ने काम कराया?कितना भुगतान हुआ?
और सबसे अहम—काम वास्तव में हुआ भी या नहीं?
इन सवालों के जवाब सरकारी दस्तावेजों और मौके के भौतिक सत्यापन से ही मिल सकते हैं।
जनता को चाहिए पूरा हिसाब
सांसद और विधायक निधि किसी की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन है। इसलिए जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके नाम पर जारी हुई रकम किस काम में खर्च हुई।
अगर पिछले पांच वर्षों के सभी कार्यों की सूची सार्वजनिक कर प्रत्येक कार्य का जमीनी सत्यापन कराया जाए तो करीब 50 करोड़ रुपये की विकास निधि के इस्तेमाल की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि पैसा खर्च हुआ या नहीं।
सवाल इससे बड़ा है—
जिस विकास पर करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा है, वह विकास जमीन पर दिखाई क्यों नहीं देता?
स्रोत : उपलब्ध सरकारी आंकड़े, स्थानीय स्तर से प्राप्त जानकारी एवं मीडिया रिपोर्टों के आधार पर। कमीशन संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष लिया जाना शेष है।

