इंडसइंड बैंक ने भारत के तेज़ी से बढ़ते जीसीसी क्षेत्र के लिए शुरू की विशेष बैंकिंग सेवा
यह नई पहल कॉरपोरेट और कर्मचारियों की बैंकिंग सेवाओं को जोड़ती है, साथ ही डिजिटल माध्यम से आसान बैंकिंग और भारत केंद्रित विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध कराती है।
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान मुंबई महाराष्ट्र
मुंबई, : इंडसइंड बैंक ने आज अपना विशेष जीसीसी बैंकिंग सेवा लॉन्च करने की घोषणा की। यह भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (वैश्विक क्षमता केंद्र) परितंत्र के लिहाज़ से नई पहल है। बैंक विशेष जीसीसी संबंध मॉडल के तहत कॉर्पोरेट और कर्मचारी बैंकिंग क्षमताओं को साथ लाकर, जीसीसी की विशिष्ट ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अधिक एकीकृत और विशिष्ट दृष्टिकोण अपना रहा है। डिजिटल आधारित प्लेटफॉर्म, तेज़ सेवा और भारत केंद्रित परामर्श की विशेषज्ञता के साथ, यह सुविधा सहज बैंकिंग अनुभव प्रदान करती है। इससे जीसीसी को एक ही बैंकिंग भागीदार के ज़रिए कई तरह के समाधान हासिल होते हैं।
भारत के जीसीसी परितंत्र में वित्त वर्ष 2021 से अब तक 32% बढ़ोतरी हुई है और अब इसमें 2,117 जीसीसी शामिल हैं। इससे वैश्विक क्षमता केंद्र (ग्लोबल कैपेबिलिटी हब) के तौर पर देश के बढ़ते महत्व और इस क्षेत्र की बढ़ती जटिल बैंकिंग ज़रूरतें रेखांकित होती हैं।
इंडसइंड बैंक की जीसीसी बैंकिंग सेवा, बैंक की पांच मुख्य क्षमताओं – डिजिटल बैंकिंग, कर्मचारी बैंकिंग, कमर्शियल कार्ड समाधान, कैपिटल अकाउंट (पूंजी खाता) और फेमा समाधान, और गिफ्ट सिटी स्थित बैंक की अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग इकाई (आईबीयू) के ज़रिए विदेशी मुद्रा खाते – को एक ही बैंकिंग संबंध के तहत साथ लाती है। यह एकीकृत दृष्टिकोण जीसीसी को अपने व्यवसाय, कार्यबल और सीमा पार बैंकिंग आवश्यकताओं के प्रबंधन में मदद करता है।
इंडसइंड बैंक के कंट्री हेड – कॉर्पोरेट बैंकिंग, नीरज शाह ने कहा, “भारत का जीसीसी परितंत्र, पारंपरिक साझा सेवा परिचालन (शेयर्ड-सर्विसेज ऑपरेशन) तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब ये सेंटर वैश्विक संगठनों के लिए टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, फाइनेंस, रिसर्च और अन्य रणनीतिक कामकाज भी कर रहे हैं। इस क्षेत्र के दायरे और रणनीतिक महत्व में बढ़ोतरी के बीच इसकी बैंकिंग ज़रूरतें भी अधिक बढ़ती जा रही हैं। इंडसइंड बैंक ऐसे एकीकृत बैंकिंग दृष्टिकोण से इन बदलती ज़रूरतों को पूरा करना चाहता है, जो भारत से जुड़ी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप आवश्यक क्षमताओं और विशेष परामर्श को साथ लाए।”
जीसीसी बैंकिंग की यह पहल तीन सिद्धांतों पर आधारित है:
एकीकृत: कॉर्पोरेट और कर्मचारी बैंकिंग ज़रूरतों के लिए समान संबंध, जिसमें सभी पांच मुख्य क्षमताएं शामिल हैं।
डिजिटल आधारित: ऐसे डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म और समाधान जो जीसीसी और उनके कर्मचारियों की परिचालन से जुड़ी ज़रूरतों के साथ आसानी से जुड़ सकें।
उत्तरदायी (रिस्पॉन्सिव): जीसीसी की बैंकिंग और परिचालन से जुड़ी ज़रूरतों में बदलाव के साथ उन्हें सहायता प्रदान करने के लिए वरिष्ठ स्तर पर पहुंच और भारत पर केंद्रित विशेष परामर्श की सुविधा।
गिफ्ट सिटी की अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग इकाई (आईबीयू) इस प्रस्ताव को और मज़बूती प्रदान करती है, साथ ही यह विभिन्न जीसीसी को बैंक की हर तरह की बैंकिंग क्षमताओं के साथ-साथ विदेशी मुद्रा खाते से जुड़े समाधानों तक पहुंच भी प्रदान करती है।



