पूणे

चैतन्य सुख ही जीवन का परम सत्य डॉ. विजय भटकर के विचार

चैतन्य सुख ही जीवन का परम सत्य डॉ. विजय भटकर के विचारः एमआईटी डब्ल्यूपीयू द्वारा आयोजित प्रथम वैश्विक
कॉन्शियसनेस -‘द अल्टिमेट रियॅलिटी’ सम्मेलन का समापन समारोह

पुणे : चेतना का असली रूप ज्ञान और प्रज्ञान में निहित है. मनुष्य यह जानने की कोशिश कर रहा है कि परम सत्य क्या है. खुशी हमेशा मानव जाति को चुंबक की तरह आकर्षित करती है. तो सच्चित आनंद ही परम सत्य है. यह विचार विश्व प्रसिद्ध कंप्यूटर विशेषज्ञ पद्मभूषण डॉ. विजय भटकर ने व्यक्त किए.
एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के एमआईटी स्कूल ऑफ कॉन्शियसनेस एंड अल्टीमेट रियलिटी की ओर से देश में पहली बार आयोजित दो दिवसीय विश्व स्तरीय सम्मेलन कॉन्शियसनेसःअल्टीमेट रियलिटी के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे.
कार्यक्रम की अध्यक्षता एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने निभाई.
साथ ही एमआईटी स्कूल ऑफ कॉन्शियसनेस एंड अल्टीमेट रियलिटी के निदेशक डॉ. जयंत खंदारे और प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. दीपक रानडे मौजूद थे.
डॉ. विजय भटकर ने कहा, विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय से दी जाने वाली शिक्षा से ही मनुष्य सफल होता है. खोज और अनुभव के बाद ही मानव चेतना के द्वार खोले जा सकते है. इस सम्मेलन में वैज्ञानिकता और भारतीय दर्शन क्या है, वेद क्या कहते है, जीवन की नवीनता क्या है, आदि विषयों पर चर्चा की गई. जिस दिन विदेशी छात्र भारत में शिक्षा के लिए आएंगे, यह देश वास्तव में विश्व गुरु बन जाएगा.
डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, यह सम्मेलन पूरी मानव जाति के कल्याण के लिए जरूरी है. अशांत मन को नियंत्रित करने के लिए ध्यान आवश्यक है. जीवन के परम सत्य को देखना है तो मन की गहराइयों में झांकना होगा. संत ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम महाराज द्वारा बताया गया मार्ग ही दुनिया को सुख, संतोष और शांति का मार्ग दिखाएगा.
डॉ. दीपक रानडे ने दो दिवसीय सम्मेलन की जानकारी दी. साथ ही पुणे डिक्लेरेशन भी घोषित किया, जिसे उपस्थितों ने मंजूरी दी.
दिन भर चले सत्र के दौरान डॉ. एस.पी. शुक्ला, डॉ. दीपक रानडे, डॉ. अमित चौधरी, मोहन उत्तरवार, डॉ. संजय उपाध्याय, प्रो. सिध्दार्थ सिंह, डॉ. एस.एन.पठान, राजेश भूतकर, गिरीश अत्रे, डॉ. राधव कोली और डॉ. जयंत खंदारे ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे.
डॉ. सुमन कौल ने सभी का आभार माना

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button