इटावाउत्तर प्रदेश

केवल कार्यक्षेत्र बदलने से नहीं टूटेगा सांठगांठ का तंत्र, मुख्यमंत्री योगी से प्रदेशव्यापी सख्त नीति की मांग

लेखपालों और सचिवों के भ्रष्टाचार पर वार के लिए पारदर्शी ट्रांसफर नीति अनिवार्य

केवल कार्यक्षेत्र बदलने से नहीं टूटेगा सांठगांठ का तंत्र, मुख्यमंत्री योगी से प्रदेशव्यापी सख्त नीति की मांग

इटावा,विशेष संवाददाता 

इटावा/यूपी:उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक निर्णायक पहल की जरूरत अब और अधिक महसूस की जा रही है। तहसील व ब्लॉक स्तर पर लंबे समय से जमे लेखपालों और ग्राम सचिवों के कार्यक्षेत्रों में केवल आंतरिक फेरबदल कर देने से न तो भ्रष्टाचार की जड़ें हिलती हैं, और न ही पारदर्शिता सुनिश्चित हो पाती है।

ताज़ा उदाहरण जसवंत नगर तहसील का है, जहां उपजिलाधिकारी श्री कुमार सत्यम जीत ने लेखपालों के कार्यक्षेत्रों में बड़ा बदलाव किया। शुभ्रा दुबे को धनुआ से राय नगर, मनोज कुमार को कुरुसेना से धरवार, सौरभ कुमार को नसीरपुर से नगला तौर, जयपाल सिंह को धरवार से जगसौरा आदि स्थानों पर भेजा गया है। लेकिन ये सभी स्थानांतरण एक ही तहसील या विकासखंड की सीमाओं के भीतर हैं।

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि ऐसे सीमित तबादलों से कर्मचारी अपने वर्षों पुराने स्थानीय नेटवर्क और लाभ की स्थिति को बनाए रखते हैं। यह ‘स्थान बदलो लेकिन सिस्टम मत बदलो’ की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है। नतीजतन, भ्रष्टाचार का तंत्र जस का तस बना रहता है और ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारी/कर्मचारी हाशिए पर चले जाते हैं।

पत्रकार समुदाय, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सजग नागरिकों का मानना है कि लेखपालों और सचिवों की पारदर्शी इंटर-डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर नीति समय की जरूरत है। एक ही जिले में वर्षों तैनाती पाने वालों पर संदेह का वातावरण बनता है, और शासन-प्रशासन की साख भी प्रभावित होती है।

पिछले वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ की नीति को आगे बढ़ाया है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर अभी भी लेखपाल और सचिव वर्ग में तबादलों की अपारदर्शिता बनी हुई है। ज़िला स्तर पर पनपती लॉबी और भाई-भतीजावाद की संस्कृति को तोड़ना अब अनिवार्य हो गया है।

ब्लॉक कार्यालय सूत्रों का कहना: ब्लांक या क्षेत्र बदलने से क्या फर्क पड़ता है।कोई जिला बंदरगाह तो नही हो?है तो जिले में हमें कुछ फर्क नहीं पड़ता जा चलता है वह चलता रहेगा।जब एक जिले से दुसरे जिले में तब्दील होते तो फिर गड़बड़?

 

 

हमारी मांगें और सुझाव :

1. लेखपालों व सचिवों के स्थानांतरण हेतु स्पष्ट, पारदर्शी और सख्त नीति बनाई जाए।

2. एक ही जिले या ब्लॉक में लगातार 3 वर्षों से अधिक तैनाती पर रोक लगे।

3. सभी तबादलों को ऑनलाइन ट्रांसफर पोर्टल से जोड़ा जाए, जिससे राजनीतिक व व्यक्तिगत हस्तक्षेप खत्म हो।

4. जिला से बाहर ट्रांसफर की अनिवार्यता को नीति में शामिल किया जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से यह अपेक्षा है कि वे इस गहन समस्या पर अविलंब संज्ञान लें और प्रदेश में लेखपालों व सचिवों के लिए एकीकृत, पारदर्शी व भ्रष्टाचारमुक्त ट्रांसफर नीति लागू करें। यही ईमानदार प्रशासन और वास्तविक सुशासन की नींव बनेगा।

 

जनहित में जारी :पत्रकार समुदाय, प्रशासनिक सूत्र, जागरूक नागरिक मंच

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