रीवा

सौर ऊर्जा की कार्यशाला में दी गई पीएम सूर्यघर और पीएम कुसुम योजना की जानकारी

सौर ऊर्जा की कार्यशाला में दी गई पीएम सूर्यघर और पीएम कुसुम योजना की जानकारी

भविष्य की ऊर्जा आवश्यकता नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों से ही होगी पूरी – कलेक्टर रीवा

सौर ऊर्जा से मिलने वाला लाभ ही इसका सबसे बड़ा आकर्षण है – कलेक्टर सीधी

 

रीवा विशाल समाचार संवाददाता: कलेक्ट्रेट के मोहन सभागार में कमिश्नर बीएस जामोद की विशेष पहल पर सौर ऊर्जा की संभागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना तथा प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तकनीकी और सैद्धातिंक पक्षों की विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यशाला में कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने कहा कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकता नवकरीण ऊर्जा स्त्रोतों से ही पूरी होगी। सूर्य ऊर्जा का अक्षय भण्डार है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों में हुई तकनीकी प्रगति से इस क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है। सौर ऊर्जा प्रदूषण रहित, सुरक्षित और कम लागत में अधिक लाभ देने वाली प्रणाली है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना और प्रधानमंत्री कुसुम योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करें। इनके माध्यम से किसान बिजली बिलों से मुक्ति पाने के साथ अतिरिक्त बिजली फीडर में देकर लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं। अनुपजाऊ और पड़ती भूमि में बड़े सोलर सिस्टम लगाकर महीने में लाखों रुपए की आमदनी प्राप्त की जा सकती है।

कलेक्टर ने कहा कि मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से काम किया जा रहा है। रीवा में अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट से 750 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। रीवा में कई शासकीय कार्यालयों और बड़े संस्थानों में सोलर पावर प्लांट लगाए गए हैं। ऊर्जा विभाग तथा अन्य सभी विभाग मिलकर नवकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लगातार लोगों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। पीएचई विभाग की नलजल योजनाओं, नगर निगम में स्ट्रीट लाइट, नेशनल हाईवे में स्ट्रीट लाइट तथा सभी नगरीय निकायों में स्ट्रीट लाइट के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया जा सकता है। सौर ऊर्जा की योजनाओं की जानकारी के साथ उनमें अनुदान का लाभ, बैंकों से ऋण की सुविधा तथा सभी प्रमुख बातों का उल्लेख करते हुए पम्पलेट के माध्यम से आमजनता तक जानकारी पहुंचाएं।

 

कार्यशाला में कलेक्टर सीधी स्वरोचिष सोमवंशी ने कहा कि किसान अपना हानि-लाभ जानते हैं। सौर ऊर्जा से सिंचाई पंप तथा घरेलू उपयोग की पूरी बात किसानों को ठीक से समझाने पर योजना का तेजी से क्रियान्वयन होगा। सौर ऊर्जा से मिलने वाला लाभ ही इसका सबसे बड़ा आकर्षण है। घरेलू उपयोग तथा सिंचाई पंप के लिए सौर ऊर्जा के उपयोग की तकनीकी जानकारी, लागत और लाभ सरल भाषा में आमजनता तक पहुंचाना आवश्यक है। किसान यदि अपनी जमीन पर एक से दो मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाता है तो उसे खेती की तुलना में अधिक आर्थिक आय होने पर ही इसे सफलता मिलेगी। कार्यशाला में एनएसईएफआई के प्रतिनिधियों ने सौर ऊर्जा के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

 

कार्यशाला में बताया गया कि देश में बिजली की कुल खपत का 21 प्रतिशत सिंचाई के लिए होता है। मध्यप्रदेश में यह प्रतिशत बढ़कर 29 है। किसानों के सिंचाई पंप यदि सौर ऊर्जा से चलने लगें तो इस बिजली का अन्य क्षेत्र में उपयोग संभव होगा। सौर ऊर्जा से चलने वाले सिंचाई पंपों में वोल्टेज कम होने, बिजली गोल होने और लाइन लॉस भी शून्य होगा। किसानों को सिंचाई के लिए किसी तरह का बिल नहीं देना पड़ेगा। किसान को तीन हार्सपावर तक के सोलर पंप लगाने पर लगभग 90 प्रतिशत की छूट मिलेगी। किसान केवल 9500 रुपए देकर सोलर सिंचाई पंप लगा सकते हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन के दो मेगावाट के संयंत्र के लिए 7.5 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। इसकी लागत लगभग 7 करोड़ रुपए है जिसमें लगभग 65 प्रतिशत छूट का लाभ मिलेगा। इसमें संयंत्र स्थापित करने के बाद बिजली ग्रिड में देने के लिए 25 साल का अनुबंध करना आवश्यक होगा। इससे हर महीने तीन से चार लाख रुपए की आमदनी होगी। बैंक लोन लेने पर 12 साल में ऋण की राशि अदा हो जाती है और लगभग 20 साल तक नाममात्र के खर्चे पर तीन से चार लाख रुपए महीने की आमदनी होती है। इसे बिजली ग्रिड से पाँच किलोमीटर के दायरे में ही स्थापित करने की सुविधा है।

 

 

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