इटावा

धरवार पंचायत में मनरेगा घोटाला उजागर – आदेश में गड़बड़ी साबित, फिर भी सेवक बचा!

धरवार पंचायत में मनरेगा घोटाला उजागर – आदेश में गड़बड़ी साबित, फिर भी सेवक बचा!

निरीक्षण रिपोर्ट में काम फर्जी, मजदूर नदारद – कार्रवाई की जगह चेतावनी देकर प्रशासन ने भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया।

जब घोटाला पकड़ा गया तो “चेतावनी” देकर बचा लिया!

धरवार पंचायत में मनरेगा फर्जीवाड़ा – आदेश में दोषी रोजगार सेवक चिन्हित, लेकिन अफसरों ने कार्रवाई से परहेज किया।

मनरेगा में लूट आदेश भी गवाही, अफसर भी खामोश!

धरवार पंचायत में कागज़ी काम, धरातल पर सन्नाटा – रिपोर्ट ने पोल खोली, मगर कार्रवाई ठंडे बस्ते में।

गरीबों की योजना बनी भ्रष्टाचार का अड्डा!

धरवार पंचायत में मनरेगा का पैसा हड़पने का खेल उजागर – रोजगार सेवक को बचाकर प्रशासन पर उठे सवाल।

धरवार पंचायत में मनरेगा का खेल – भ्रष्टाचार उजागर, मगर गुनहगार सुरक्षित!

निरीक्षण में मिली अनियमितता, आदेश में दर्ज लापरवाही – लेकिन अफसरों ने कार्रवाई की जगह लीपापोती की।

 

धरवार पंचायत में मनरेगा घोटाला उजागर आदेश में गड़बड़ी साबित, लेकिन अफसरों ने भ्रष्टाचारियों को बचाया!

विशाल समाचार संवाददाता इटावा 

 

इटावा: जसवंतनगर क्षेत्र की ग्राम पंचायत धरवार में मनरेगा योजना को खुलेआम लूट की योजना बना दिया गया है। 29 अप्रैल को हुए निरीक्षण और 1 मई 2025 को जारी आदेश में साफ़-साफ़ दर्ज है कि पंचायत में जो काम कागज़ों पर पूरे दिखाए गए, वे ज़मीन पर कहीं मौजूद नहीं हैं। मजदूर काम करते नहीं मिले, खुदाई अधूरी मिली और कागज़ी घोटाले से सरकारी पैसा हज़म कर लिया गया।

 

ग्राम रोजगार सेवक धरवार, यदुवीर सिंह की लापरवाही रिपोर्ट में साफ़ लिखी गई, लेकिन अफसरों ने उस पर कार्रवाई करने की बजाय केवल चेतावनी देकर बचा लिया। यानी भ्रष्टाचार साबित भी हुआ और दोषी भी चिन्हित हुआ, लेकिन निलंबन-कार्यवाही के बजाय “भविष्य में सुधार की नसीहत” देकर मामला रफा-दफा कर दिया गया।

 

गांव के लोगों का कहना है कि यह “चेतावनी” असल में भ्रष्टाचार को खुली छूट देने जैसा है। सवाल उठ रहा है कि जब आदेश की कॉपी में ही गड़बड़ी और जिम्मेदारी तय है, तो फिर आखिर कार्रवाई किसके दबाव में रोकी गई? कौन से अफसर इस खेल के पीछे खड़े हैं?

 

यह मामला केवल धरवार पंचायत का नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की सच्चाई उजागर करता है—जहां गरीब मजदूरों के नाम पर करोड़ों की योजना आती है और फर्जीवाड़ा करके पैसों की बंदरबांट होती है। और जब यह पकड़ में आता है तो अफसर “सख्त कार्रवाई” की जगह कागज़ पर “चेतावनी” लिखकर भ्रष्टाचारियों को बचा लेते हैं।

 

इस पूरे मामले में आदेश जारी करने वाले अधिकारी खण्ड विकास अधिकारी, जसवंतनगर, इटावा श्वेता गर्ग हैं, जिन्होंने 01 मई 2025 को यह आदेश पारित किया है। आदेश में साफ़-साफ़ गड़बड़ी दर्ज होने के बावजूद केवल चेतावनी देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

 

अब देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन इस फर्जीवाड़े पर कब तक पर्दा डालता है और क्या कभी मनरेगा घोटाले के असली गुनहगारों पर गाज गिरेगी, या यह मामला भी सरकारी फाइलों की धूल में दबकर रह जाएगा।

 

 

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