
इटावा की खाकी पर फिर दाग – SSP की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
इटावा (यूपी): विशाल समाचार संवाददाता
जिला अस्पताल में घटित एक चौंकाने वाली घटना ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग आमने-सामने ला दिया है। आरोप है कि बीती रात एसएसपी की मां की तबीयत बिगड़ने पर इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक को पुलिसकर्मियों ने जबरन उठा ले जाकर इलाज के लिए बुला लिया।
सवाल यह है कि जब अस्पताल में तमाम मरीजों की जिम्मेदारी उस चिकित्सक पर थी, तो उसे अपनी ड्यूटी पोस्ट से हटाना कहां तक जायज़ है? क्या एक वीआईपी मरीज के लिए बाकी मरीजों की जिंदगी दांव पर लगाना उचित है?
डॉक्टर और कर्मचारी भड़के – ओपीडी सेवाएं ठप
सुबह होते-होते मामला गरमा गया। जिला अस्पताल परिसर में चिकित्सकों और कर्मचारियों ने जमकर हंगामा किया। राज्य कर्मचारी यूनियन, पीएमएस यूनियन और फार्मासिस्ट संघ के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने डॉक्टर कक्ष और दवा वितरण कक्ष पर ताला डाल दिया और सीएमएस से पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने की मांग की।
SSP का कदम – दो पुलिसकर्मी लाइन हाजिर
घटना के बाद SSP ने दो पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर जांच शुरू कर दी। लेकिन अस्पताल सूत्रों का कहना है – “इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर को जबरन उठाना किस कानून में जायज़ है? मरीज को अस्पताल लाना चाहिए था, न कि डॉक्टर को खींचकर ले जाना। यह सब SSP की जानकारी के बिना कैसे संभव है?”
बड़ा सवाल – जिम्मेदार कौन?
यह पहली बार नहीं कि इटावा में खाकी का रवैया सवालों में है। लेकिन इस बार मामला सीधे स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की जान से जुड़ा है।
अगर SSP की सहमति से डॉक्टर को उठाया गया, तो यह शक्ति का दुरुपयोग है।?
अगर SSP को जानकारी नहीं थी, तो फिर पुलिसकर्मी इतनी हिम्मत कैसे कर गए?
दोनों ही हालात में जवाबदेही SSP की ही बनती है।
आज अगर SSP कार्यालय से जुड़े पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को जबरन उठा सकते हैं, तो कल कोई और दबंग भी डॉक्टरों को इसी तरह उठा ले जाएगा। यह स्थिति कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।
इटावा का सवाल – SSP की कुर्सी बचेगी या जाएगी?
जनता और चिकित्सक समुदाय का गुस्सा यही कह रहा है कि सिर्फ दो पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर करना खानापूरी है। असली जिम्मेदारी SSP पर है और इस घटना के बाद उनका तबादला अब तय माना जा रहा है।

