
अशोक साळुंखे की चित्रों में रंगों का अनोखा सामंजस्य,प्रसिद्ध चित्रकार व शिल्पकार संजीव संकपाळ के उद्गार
निसर्ग चित्रकार अशोक साळुंखे की प्रदर्शनी ‘चित्रकर्म’ का शुभारंभ
पुणे,: चित्रकार अशोक साळुंखे की कलाकृतियों में रंगों का संतुलन, समय का अंकन और वातावरण रचने की अनोखी अनुभूति मिलती है। उनके चित्र रंगों के सामंजस्य (कलर हार्मनी) का सुंदर उदाहरण हैं, ऐसा मत प्रसिद्ध चित्रकार और शिल्पकार संजीव संकपाळ ने व्यक्त किया। संकपाळ ने कहा, “साळुंखे की कृतियाँ एक शांत वातावरण निर्मित करती हैं और यही उनका विशेष गुण है।”
वे अशोक साळुंखे की निसर्गचित्रों की प्रदर्शनी ‘चित्रकर्म’ के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। पिछले 19 वर्षों से कला को समर्पित और नेचर लैंडस्केप आर्टिस्ट के रूप में ख्यात अशोक साळुंखे की इस प्रदर्शनी का आयोजन पुणे के घोले रोड स्थित राजा रवि वर्मा आर्ट गैलरी में किया गया है।
इस अवसर पर पुणे महानगरपालिका की स्थायी समिति के पूर्व अध्यक्ष योगेश मुळिक, स्वयं चित्रकार अशोक साळुंखे, चित्रकार लुएल लोपेज, अतुल डाके, आर्ट पुणे फाउंडेशन के संजीव पवार आदि मान्यवर उपस्थित रहे। यह प्रदर्शनी रविवार 21 सितम्बर तक प्रतिदिन सुबह 11 से शाम 7 बजे तक सभी दर्शकों के लिए निःशुल्क खुली रहेगी।
संजीव संकपाळ ने आगे कहा—“साळुंखे मेरे मित्र, सहपाठी और भाई समान हैं। मैंने उनके पूरे चित्र-प्रवास को नजदीक से देखा है। एनिमेशन से शुरुआत कर उन्होंने खुद को एक सशक्त निसर्ग चित्रकार के रूप में स्थापित किया है। करड़े (ग्रे) रंग की विभिन्न छटाओं से उन्होंने जो वातावरण गढ़ा है, वह अनोखा है। उनके चित्रों में छायाप्रकाश का सुंदर खेल है और ग्रामीण परिवेश की मिट्टी की गंध महसूस होती है।”
इस अवसर पर योगेश मुळिक ने कहा—“साळुंखे के चित्र देखने पर ऐसा लगता है कि हम भी किसी शांत व प्राकृतिक जगह पर पहुँच गए हैं। गाँव का वातावरण, नदियाँ, तालाब, समुद्र—इन दृश्यों का सजीव अनुभव उनकी चित्रकृतियों से होता है।”
अपने विचार रखते हुए चित्रकार अशोक साळुंखे ने कहा—“मैंने कई वर्ष आईटी क्षेत्र में काम किया, लेकिन मन की आवाज़ सुनते हुए कला को ही जीवन बना लिया। प्रदर्शनी में शामिल 50% से अधिक चित्र स्थल पर ही बनाए गए हैं। एक्रेलिक और जलरंग मेरी प्रिय माध्यम रहे हैं। परिवार और पत्नी का सहयोग इस यात्रा में सबसे बड़ा संबल है। प्रकृति ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है।”

