
पुणे में “खेळ रंगला वारकऱ्यांचा” कार्यक्रम आयोजित
वारकरी परंपरा के पारंपरिक खेलों में हजारों श्रद्धालुओं ने लिया उत्साहपूर्वक भाग
पुणे: “पुंडलिक वरदा हरी विठ्ठल” और “जय जय रामकृष्ण हरी” जैसे जयघोषों से पुणे गूंज उठा। अवसर था वारकरी परंपरा को समर्पित कार्यक्रम “खेळ रंगला वारकऱ्यांचा” का, जिसका आयोजन महाराष्ट्र में पहली बार मुळशी के युवानेता मिलिंद दादा वाळंज युवा मंच की ओर से सनीज वर्ल्ड, सूस में किया गया।
इस कार्यक्रम में महाराष्ट्रभर से हजारों वारकरी आए और पारंपरिक खेलों — रिंगण, फुगड़ी, काटवट कणा, कांदा फोड़, तळ्यात-मळ्यात — में हरिनाम संकीर्तन और जयघोष के बीच उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नंदकुमार (बाबूजी) वाळंज ने की। इस अवसर पर सांसद श्रीरंग बारणे, विधायक शंकर भाऊ मांडेकर, विधायक अतुल शेठ बेनके, समाजसेवी और युवा नेता मिलिंद वाळंज, ह.भ.प. पांडुरंग महाराज शास्त्री शितोळे, तथा वारकरी संप्रदाय के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर पहले दस वारकरी दंपतियों को विमान से काशी दर्शन यात्रा का विशेष सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही, सेवाभावी आशा वर्कर्स की नौ कार्यकर्ताओं का भी मान्यवरों के हाथों सत्कार किया गया।
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भ.प. पांडुरंग महाराज शास्त्री शितोळे ने कहा, “अध्यात्म, विज्ञान और राजनीति का संतुलन तभी समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी होता है। वारकरी संप्रदाय का दर्शन शांति और सहयोग का संदेश देता है। इसके खेल शारीरिक और मानसिक दृष्टि से स्वास्थ्यवर्धक हैं।”
मिलिंद दादा वाळंज ने कहा, “वारकरी परंपरा हमारे परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। बाबूजी ने जो कार्य प्रारंभ किया, उसे मैं निरंतर आगे बढ़ाऊँगा। सच्चा वारकरी वही है जो भगवान पांडुरंग के चरणों में नतमस्तक होकर आभार व्यक्त करता है और हर समय प्रभु का स्मरण करता है।”

विधायक अतुल शेठ बेनके ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को संस्कार देने का कार्य कठिन हो गया है, लेकिन वारकरी संप्रदाय इसे प्रभावी रूप से कर सकता है।
इस कार्यक्रम में सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक क्षेत्र के अनेक मान्यवरों के साथ-साथ मुळशी तालुका के वारकरी संप्रदाय के सभी प्रमुख पदाधिकारी और ग्राम पंचायत प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन राजेश मारणे ने किया।

